UP Outsource Employees Salary : उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के करीब 3.50 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों का मानदेय दोगुना तक बढ़ा दिया है। बुधवार को एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम, यानी यूपीकॉस का शुभारंभ किया। अब आउटसोर्स कर्मियों की भर्ती इसी निगम के जरिए होगी। कर्मचारियों को हर महीने 5 तारीख तक वेतन खाते में मिलेगा और दुर्घटना या आपदा की स्थिति में 40 लाख रुपये तक की बीमा सुरक्षा दी जाएगी। कंपनियां अपनी मर्जी से किसी कर्मी को नौकरी से नहीं निकाल पाएंगी। मुख्यमंत्री के मुताबिक निगम बनने से कर्मचारियों और उनके परिवारों समेत 17 से 20 लाख लोगों को लाभ मिलेगा।
किस श्रेणी में कितना मानदेय तय हुआ
आउटसोर्स कर्मियों को चार श्रेणियों में बांटा गया है और हर श्रेणी का मानदेय अलग है। सबसे ऊपर की श्रेणी में डॉक्टर, अभियंता और लेक्चरर जैसे पद हैं, जबकि सबसे नीचे की श्रेणी में कार्यालय सहायक, चौकीदार और माली जैसे पद आते हैं। एक बात ध्यान देने की है कि सरकार ने मानदेय “दोगुना तक” बढ़ाने की बात कही है। इसका मतलब है कि बढ़ोतरी की अधिकतम सीमा दोगुनी है, यानी हर कर्मचारी का मानदेय ठीक दोगुना होना जरूरी नहीं है। नीचे की तालिका में हर श्रेणी का मासिक मानदेय और उसके हिसाब से सालाना रकम दी गई है।
| श्रेणी | मासिक मानदेय | सालाना (12 महीने) |
|---|---|---|
| श्रेणी-1 | 40,000 रुपये | 4,80,000 रुपये |
| श्रेणी-2 | 25,000 रुपये | 3,00,000 रुपये |
| श्रेणी-3 | 22,000 रुपये | 2,64,000 रुपये |
| श्रेणी-4 | 20,000 रुपये | 2,40,000 रुपये |
आपका पद किस श्रेणी में आएगा
श्रेणी-1 में डॉक्टर, अभियंता, एई, एसडीओ, लेक्चरर और अकाउंट अफसर जैसे पद रखे गए हैं, और इसके लिए परास्नातक डिग्री अनिवार्य होगी। श्रेणी-2 में जेई, स्टाफ नर्स, एक्स-रे टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट, लीगल असिस्टेंट और सांख्यिकी अधिकारी जैसे पद आएंगे। श्रेणी-3 में ऑपरेटर, पैरामेडिकल स्टाफ, टाइपिस्ट, इलेक्ट्रीशियन, मैकेनिक, फिटर, सुपरवाइजर, ड्राइवर और स्टोर कीपर शामिल हैं। श्रेणी-4 के लिए न्यूनतम योग्यता आठवीं या दसवीं पास रखी गई है, और इसमें कार्यालय सहायक, लिफ्ट ऑपरेटर, अर्दली, अनुसेवक, नाई, मोची, चौकीदार, माली, कुक, जमादार और फायरमैन जैसे पद हैं।
अब भर्ती कैसे होगी
आउटसोर्स कर्मियों की भर्ती का तरीका बदल दिया गया है। इसके लिए उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम बनाया गया है और आगे की सारी भर्ती यही निगम करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि भर्ती आरक्षण नीतियों के तहत योग्यता और मेरिट के आधार पर होगी। भर्ती, पोस्टिंग, उपस्थिति, मानदेय, ग्रेच्युटी, बीमा और सेवा लाभ, इन सबकी निगरानी डिजिटल तरीके से की जाएगी। यानी किसे कहां तैनात किया गया और उसे कितना भुगतान हुआ, यह सारा रिकॉर्ड एक ही व्यवस्था में दर्ज रहेगा, जिससे कंपनियों की मनमानी पर रोक लगने की बात कही गई है।
वेतन कब मिलेगा और पोर्टल पर क्या देख सकेंगे
निगम का अपना पोर्टल और वेबसाइट शुरू की गई है, और साथ में निगम का लोगो भी जारी हुआ है। कर्मचारी इस पोर्टल पर अपना सेवा विवरण, अकाउंट, उपस्थिति, भुगतान और कटौती की जानकारी ऑनलाइन देख सकेंगे। कोई शिकायत हो तो उसे भी पोर्टल पर ही दर्ज कराया जा सकेगा। वेतन हर महीने 5 तारीख तक खाते में पहुंचाने की बात कही गई है। इसके अलावा ईपीएफ और ईएसआई का अंशदान भी नियमित रूप से जमा होगा। सरकार आउटसोर्स एजेंसी को सर्विस चार्ज खुद देगी, इसलिए एजेंसी इसे कर्मचारी के मानदेय से नहीं काट सकेगी।
बीमा और बच्चों की पढ़ाई-शादी के लिए मदद
घटना, दुर्घटना या आपदा का शिकार होने पर कर्मचारी और उसके परिवार को 40 लाख रुपये तक की बीमा सुरक्षा मिलेगी। किसी कर्मचारी की मृत्यु होने पर परिजनों को तुरंत 50 हजार रुपये दिए जाएंगे, ताकि शुरुआती खर्च की दिक्कत न आए। बच्चों की शिक्षा के लिए भी अलग से सहायता तय हुई है। बेटे की पढ़ाई के लिए आठ लाख रुपये तक और बेटी की पढ़ाई के लिए 10 लाख रुपये तक की मदद दी जाएगी। दो पुत्रियों के विवाह के लिए आठ से 10 लाख रुपये तक की सहायता का प्रावधान भी किया गया है।
इलाज और मातृत्व अवकाश की सुविधा
ईएसआई अंशदान जमा होने से कर्मचारियों को ईएसआई अस्पतालों में निशुल्क इलाज की सुविधा मिलेगी। अगर किसी बीमारी का इलाज ईएसआई अस्पताल में उपलब्ध नहीं हुआ, तो उसे आयुष्मान भारत योजना से जोड़ा जाएगा। महिला कर्मचारियों के लिए मातृत्व अवकाश का लाभ भी दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि मातृत्व अवकाश समेत सभी वैधानिक सेवा लाभ सुनिश्चित किए जाएंगे। इस तरह आउटसोर्स पर काम करने वाले कर्मियों को वे सुविधाएं भी मिलेंगी, जिनकी उन्हें अब तक नियमित व्यवस्था न होने से कमी रहती थी।
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