बीएड डिग्रीधारी शिक्षकों के लिए बड़ी खबर, NIOS ब्रिज कोर्स लॉन्च, जानें किन्हें करना होगा अनिवार्य

New Bridge Course For Bed Teachers : अगर आप भी बीएड डिग्री के आधार पर प्राथमिक स्कूल में सहायक अध्यापक के पद पर चयनित हुए हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रहलाद जोशी ने बुधवार को नई दिल्ली में छह महीने के अनिवार्य ब्रिज कोर्स का औपचारिक शुभारंभ किया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) से मान्यता प्राप्त इस विशेष पाठ्यक्रम को कराने की जिम्मेदारी राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान यानी एनआईओएस को सौंपी गई है। पूरे देश से अब तक 66154 शिक्षकों ने इस कोर्स के लिए आवेदन कर दिया है, जिनमें सबसे ज्यादा संख्या उत्तर प्रदेश के शिक्षकों की है। अगर आप भी इस श्रेणी में आते हैं तो नीचे पूरी जानकारी विस्तार से पढ़ें।

किन शिक्षकों के लिए है यह कोर्स अनिवार्य?

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में साफ तौर पर कहा है कि 28 जून 2018 के बाद और 11 अगस्त 2023 से पहले प्राथमिक स्कूलों में नियुक्त हुए बीएड अर्हताधारी सहायक अध्यापकों के लिए यह ब्रिज कोर्स करना पूरी तरह अनिवार्य होगा। यानी अगर आपकी नियुक्ति इसी अवधि के दौरान हुई है और आप बीएड डिग्री के आधार पर चयनित हुए थे, तो आपको यह कोर्स करना ही होगा। जो शिक्षक इस तय अवधि से बाहर नियुक्त हुए हैं, वे भी कोर्ट के आदेश वाले रास्ते से रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं, बशर्ते उन्हें इसके लिए न्यायिक छूट मिली हो। इस कोर्स की सबसे अहम शर्त यह है कि कोर्स शुरू होने की आधिकारिक तिथि से एक साल के भीतर इसे एक ही बार में सफलतापूर्वक पूरा करना होगा। अगर कोई शिक्षक तय समय-सीमा के भीतर यह कोर्स पास नहीं कर पाता है, तो उसकी नियुक्ति को सीधे तौर पर अमान्य घोषित कर दिया जाएगा, इसलिए इसे हल्के में लेने की गलती बिल्कुल न करें।

क्या यह कोर्स नई भर्तियों के लिए भी मान्य होगा?

यहां एक बात बहुत ध्यान देने वाली है, जिसे लेकर शिक्षकों में भ्रम बना हुआ है। एनआईओएस ने खुद स्पष्ट किया है कि यह ब्रिज कोर्स सिर्फ उन शिक्षकों के लिए है जो पहले से ही बीएड डिग्री के आधार पर प्राथमिक स्कूलों में नियुक्त हो चुके हैं। यह कोर्स आगे किसी नई प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए बीएड डिग्री को दोबारा मान्य योग्यता नहीं बनाता है। यानी अगर कोई उम्मीदवार भविष्य में प्राथमिक शिक्षक की नई भर्ती में आवेदन करना चाहता है, तो सिर्फ इस ब्रिज कोर्स के सर्टिफिकेट के आधार पर उसे बीएड योग्यता वाला उम्मीदवार नहीं माना जाएगा। साफ शब्दों में कहें तो यह कोर्स नौकरी बचाने के लिए है, नई नौकरी दिलाने के लिए नहीं, इसलिए इसे भर्ती योग्यता से जोड़कर देखने की गलती न करें।

किस राज्य से कितने शिक्षकों ने किया आवेदन?

एनआईओएस के पास अब तक देशभर से कुल 66154 शिक्षकों के आवेदन पहुंच चुके हैं। इनमें सबसे ज्यादा 33640 आवेदन अकेले उत्तर प्रदेश से आए हैं, जो साफ दिखाता है कि इस राज्य में बीएड आधारित नियुक्तियों की संख्या कितनी बड़ी रही है। इसके बाद मध्य प्रदेश से 10650, बिहार से 7569, पश्चिम बंगाल से 6627, असम से 1376 और छत्तीसगढ़ से 1208 शिक्षकों ने आवेदन किया है। यह आंकड़े दिखाते हैं कि उत्तर प्रदेश के हजारों शिक्षकों के भविष्य पर इस कोर्स का सीधा असर पड़ने वाला है, इसलिए राज्य के शिक्षक इस खबर पर खास नजर बनाए हुए हैं। नीचे दी गई तालिका में आप राज्यवार पूरे आंकड़े आसानी से देख सकते हैं।

राज्यआवेदक शिक्षकों की संख्या
उत्तर प्रदेश33,640
मध्य प्रदेश10,650
बिहार7,569
पश्चिम बंगाल6,627
असम1,376
छत्तीसगढ़1,208

कोर्स में शिक्षकों को क्या-क्या पढ़ना होगा?

यह कोर्स सिर्फ कागजी औपचारिकता नहीं है, बल्कि इसे बच्चों को पढ़ाने के तरीके को बेहतर बनाने के मकसद से खासतौर पर डिजाइन किया गया है। पाठ्यक्रम में बाल विकास और शिक्षा मनोविज्ञान, करिकुलम, पेडागॉजी और असेसमेंट, भाषा शिक्षण, गणित और “हमारे आसपास की दुनिया” जैसे विषय शामिल किए गए हैं। इसके अलावा शिक्षकों को खेल, कला, शिल्प, संगीत, योग, शारीरिक शिक्षा और बच्चों के समग्र स्वास्थ्य से जुड़ी गतिविधियों और वर्कशॉप में भी हिस्सा लेना होगा। कोर्स का मकसद शिक्षकों को छोटे बच्चों की विकासात्मक जरूरतों को समझने, उम्र के हिसाब से पढ़ाने की योजना बनाने, भाषा, दिव्यांगता और सामाजिक-सांस्कृतिक विविधता वाली कक्षाओं को संभालने और सही तरीके से मूल्यांकन करने के काबिल बनाना है।

स्कूल अनुभव और अटेंडेंस के क्या नियम रखे गए हैं?

कोर्स के तहत शिक्षकों को कम से कम 20 दिन का स्कूल-आधारित अनुभव लेना अनिवार्य होगा, जिसमें उन्हें असल कक्षा में बच्चों को पढ़ाने का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा। इसके साथ ही कम से कम 10 दिन की ऑनलाइन कॉन्टैक्ट क्लासेज भी अनिवार्य रखी गई हैं, ताकि शिक्षक विषय-विशेषज्ञों से सीधे मार्गदर्शन ले सकें। स्कूल-अनुभव वाले हिस्से में कम से कम 80 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है, यानी बिना पूरी उपस्थिति के इस हिस्से को पूरा हुआ नहीं माना जाएगा। जो शिक्षक इन शर्तों को पूरा नहीं करेंगे, उनका कोर्स अधूरा माना जा सकता है, जिससे सीधे उनकी नौकरी पर असर पड़ सकता है। इसलिए शिक्षकों को स्कूल अनुभव और कॉन्टैक्ट क्लासेज दोनों को गंभीरता से लेना चाहिए।

क्यों शुरू हुआ यह कोर्स, जानें पूरी वजह

यह पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के 8 अप्रैल 2024 के आदेश से शुरू हुई थी, जो बीएड योग्यताधारी शिक्षकों की प्राथमिक स्तर पर पात्रता से जुड़े मामले में दिया गया था। एनआईओएस के मुताबिक कोर्ट ने निर्देश दिया था कि इस ब्रिज कोर्स को तैयार किया जाए और इसे एनसीटीई डिजाइन करे, जबकि पूरी निगरानी शिक्षा मंत्रालय के स्तर पर हो। इसके बाद विभिन्न राज्य सरकारों ने भी करीब चार महीने पहले शिक्षकों के प्रशिक्षण को मंजूरी दे दी थी, लेकिन कुछ अध्यापकों ने ब्रिज कोर्स से छूट दिलाने की मांग को लेकर उच्चतम न्यायालय में याचिकाएं दायर कर दी थीं, जिसके चलते मामला कुछ समय के लिए अटका रहा। अब न्यायालय ने उन सभी याचिकाओं का निस्तारण कर दिया है, जिसके बाद कोर्स शुरू करने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। एनआईओएस में सक्षमता निर्माण प्रकोष्ठ के उप निदेशक डॉ. आलोक कुमार गुप्ता के मुताबिक, यह पाठ्यक्रम शिक्षकों की व्यावसायिक क्षमता को मजबूत बनाने के मकसद से खासतौर पर तैयार किया गया है, ताकि कक्षा में पढ़ाने का तरीका और बेहतर हो सके।

रजिस्ट्रेशन को लेकर अब तक क्या स्थिति रही है?

एनआईओएस पिछले काफी समय से इस कोर्स के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया चला रहा है। जुलाई 2026 में एनआईओएस ने पात्र शिक्षकों के लिए रजिस्ट्रेशन विंडो को दोबारा खोला था, ताकि जो शिक्षक पहले किसी वजह से आवेदन नहीं कर पाए थे, वे भी समय रहते इसमें शामिल हो सकें। यही वजह है कि अब तक देशभर से 66 हजार से ज्यादा शिक्षक इस कोर्स के लिए रजिस्टर कर चुके हैं। स्कूलों और राज्य शिक्षा विभागों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि कितने पात्र शिक्षक तय समय-सीमा के भीतर यह कोर्स पूरा कर पाते हैं, क्योंकि इसी पर उनकी नौकरी का भविष्य टिका हुआ है।

Sangam Patel

Sangam Patel is a Content Writer at StaffTak.in. He writes about Teacher Recruitment, Government Jobs, Education News, Scholarships, Admit Cards, Results, and Admissions, providing accurate and reliable updates from official sources.

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