किसानों के बच्चों को ₹5000 महीना स्कॉलरशिप मिलेगी ककन कौन कौन लाभ उठा सकता है और आवेदन का क्या तरीका है इस लेख में जानेंगे, खेती की लागत जिस तरह से लगातार बढ़ रही है, उसमें किसान और खेतिहार मजदूर परिवारों के लिए अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाना आसान काम नहीं रह गया है। कॉलेज की फीस, किताबें, हॉस्टल का खर्च यह सब मिलाकर एक आम किसान परिवार के लिए बड़ा बोझ बन जाता है। इसी वजह से सरकार ने मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृति योजना चला रखी है, जिसके तहत मेधावी छात्रों को पढ़ाई जारी रखने में आर्थिक मदद दी जाती है। अब इस योजना में एक बड़ा बदलाव हुआ है स्कॉलरशिप की रकम 3000 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 5000 रुपये प्रति माह कर दी गई है। यानी जो छात्र पहले हर महीने 3000 रुपये पा रहे थे, उन्हें अब उसी योजना के तहत 2000 रुपये ज्यादा मिलेंगे।
किन बच्चों को मिलेगा फायदा
इस योजना का दायरा सीमित है और इसे खासतौर पर किसान व खेतिहार मजदूर परिवारों के मेधावी बच्चों के लिए ही रखा गया है। सबसे पहली शर्त यह है कि छात्र के माता-पिता किसान हों या पंजीकृत खेतिहार मजदूर के तौर पर दर्ज हों। इसके अलावा छात्र का उत्तर प्रदेश का मूल निवासी होना भी अनिवार्य है, बाहरी राज्य के छात्र इसके लिए पात्र नहीं होंगे। चूंकि यह स्कॉलरशिप सिर्फ आर्थिक आधार पर नहीं बल्कि मेधा को भी परखकर दी जाती है, इसलिए पढ़ाई में एक तय स्तर का प्रदर्शन दिखाना जरूरी है। राज्य बोर्ड से 12वीं पास करने वाले छात्रों के कम से कम 70 प्रतिशत अंक होने चाहिए, जबकि CBSE या ICSE बोर्ड से पास हुए छात्रों के लिए यह सीमा थोड़ी ऊंची यानी 85 प्रतिशत रखी गई है। जो छात्र पोस्ट ग्रैजुएशन कर रहे हैं, उनके लिए ग्रैजुएशन में कम से कम 70 प्रतिशत अंक होना जरूरी शर्त है। कुल मिलाकर योजना उन्हीं बच्चों तक पहुंचाई जा रही है जो पढ़ाई में अच्छे रहे हों लेकिन पैसों की तंगी के चलते आगे की पढ़ाई अटकने का खतरा हो।
आवेदन में कौन-कौन से कागजात लगेंगे
छात्रवृति के लिए आवेदन करते समय कुछ जरूरी दस्तावेज साथ रखने होंगे, इनके बिना फॉर्म अधूरा माना जाएगा। छात्र का आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, पिछली परीक्षा की मार्कशीट और बैंक खाते की पूरी जानकारी देना जरूरी है ताकि स्कॉलरशिप की रकम सीधे खाते में पहुंच सके। इसके साथ ही किसान परिवार से होने का सबूत भी देना होगा, जिसके लिए खतौनी या किसान बही मान्य दस्तावेज है। अगर छात्र के माता-पिता खेतिहार मजदूर के तौर पर काम करते हैं तो उनका संबंधित श्रम कार्ड जमा करना पड़ेगा। यह ध्यान रखना जरूरी है कि दस्तावेजों में कोई भी गड़बड़ी या अधूरी जानकारी होने पर आवेदन रद्द हो सकता है, इसलिए फॉर्म भरने से पहले सारे कागजात एक साथ तैयार रखना बेहतर रहेगा।
आवेदन कैसे करना है
इस स्कॉलरशिप की खास बात यह है कि इसका आवेदन आम योजनाओं की तरह किसी वेबसाइट या पोर्टल के जरिए ऑनलाइन नहीं होता, बल्कि पूरी प्रक्रिया ऑफलाइन तरीके से पूरी करनी पड़ती है। छात्र को अपने कॉलेज या संस्थान के प्रशासनिक कार्यालय जाकर आवेदन फॉर्म प्राप्त करना होगा। फॉर्म मिलने के बाद उसमें मांगी गई सारी जानकारी सही-सही भरनी होगी और साथ में सभी जरूरी दस्तावेज संलग्न करने होंगे। फॉर्म भर जाने के बाद इसे यूं ही जमा नहीं किया जा सकता — इसे स्कूल या कॉलेज के प्रधानाचार्य या नोडल अधिकारी से प्रमाणित कराना अनिवार्य है, तभी यह आगे की प्रक्रिया के लिए मान्य होगा। प्रमाणित फॉर्म को इसके बाद अपने क्षेत्र की मंडी परिषद कार्यालय या तय की गई छात्रवृति काउंटर पर जमा करना होगा। फॉर्म जमा करते वक्त रसीद जरूर लेनी चाहिए, क्योंकि आगे चलकर आवेदन की स्थिति जानने या किसी दिक्कत की स्थिति में यही रसीद काम आएगी।
क्यों बढ़ाई गई स्कॉलरशिप की रकम
पहले मिलने वाली 3000 रुपये प्रति माह की मदद आज के समय में कॉलेज की बढ़ती फीस और रहने-खाने के खर्च के सामने काफी कम पड़ती थी। खासतौर पर वे छात्र जो अपने गांव या कस्बे से दूर शहर में पढ़ाई कर रहे हैं, उनके लिए हॉस्टल और मेस का खर्च अकेले ही स्कॉलरशिप की पूरी रकम खा जाता था। इसी वजह से मदद की रकम को 2000 रुपये बढ़ाकर 5000 रुपये प्रति माह किया गया है, जिससे छात्रों को थोड़ी और राहत मिल सके। यह बदलाव उन परिवारों के लिए खासतौर पर राहत की बात है जहां खेती ही आय का मुख्य जरिया है और बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना हर साल मुश्किल होता जा रहा है।
छात्रों के लिए महत्वपूर्ण बातें
आवेदन करने से पहले छात्रों को अपने कॉलेज या संबंधित कार्यालय से यह जरूर पता कर लेना चाहिए कि फॉर्म जमा करने की आखिरी तारीख क्या है, क्योंकि यह समय-समय पर बदलती रहती है। साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि आय प्रमाण पत्र और निवास प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज अपडेटेड हों, पुराने या एक्सपायर हो चुके दस्तावेज आवेदन में परेशानी खड़ी कर सकते हैं। जिन छात्रों के पास किसान बही या खतौनी नहीं है, उन्हें राजस्व विभाग या तहसील स्तर पर संपर्क कर यह दस्तावेज पहले से बनवा लेना चाहिए ताकि आवेदन के वक्त देरी न हो।










