प्रदेश के बेसिक स्कूलों में मिड-डे मील बनाने वाले रसोइयों के लिए अच्छी खबर आ सकती है। यूपी सरकार विधानसभा चुनाव से पहले उनका मानदेय बढ़ाने की तैयारी में जुट गई है। इस संबंध में एक हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय बढ़ाने का प्रस्ताव मिड-डे मील अथॉरिटी ने शासन को भेज दिया है। उच्च स्तर पर हुई बैठक में इस पर सहमति भी बन चुकी है, यानी अब सिर्फ औपचारिक ऐलान बाकी है। अगर यह प्रस्ताव पास होता है तो रसोइयों को मिलने वाला मानदेय 2000 रुपये से बढ़कर 3000 रुपये प्रतिमाह तक पहुंच सकता है।
अभी कितना मानदेय मिलता है
रसोइयों को अभी 2000 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता है। इसके अलावा यूनिफॉर्म के लिए 500 रुपये अलग से दिए जाते हैं, जो सीधे उनके खाते में पहुंचते हैं। वहीं 400 रुपये ईंधन के लिए स्कूलों को मिलते हैं, लेकिन यह राशि रसोइयों के नहीं बल्कि स्कूल प्रबंधन समिति के खाते में जमा होती है। यानी मानदेय के अलावा भी कुछ जरूरी खर्च सरकार की तरफ से कवर किए जाते हैं, हालांकि रसोइयों की मुख्य मांग हमेशा से मानदेय बढ़ोतरी को लेकर ही रही है।
2015 से अब तक कितना बढ़ा मानदेय, पूरा हिसाब समझिए
रसोइयों के मानदेय में बढ़ोतरी की कहानी पुरानी है। पहले उन्हें सिर्फ 1000 रुपये प्रतिमाह मिलते थे, जिसमें केंद्र सरकार का हिस्सा 600 रुपये और राज्य सरकार का हिस्सा 400 रुपये होता था। 2019 में इसे बढ़ाकर 1500 रुपये किया गया। फिर 2022 में यह राशि बढ़कर 2000 रुपये तक पहुंची, जिसमें केंद्र का योगदान 600 रुपये और राज्य का योगदान 1400 रुपये तय हुआ। अब अगर नया प्रस्ताव पास होता है तो यह चौथी बार होगा जब रसोइयों का मानदेय बढ़ाया जाएगा।
एमडीएम प्राधिकरण भेज चुका है प्रस्ताव, जल्द हो सकता है ऐलान
विधानसभा चुनाव से पहले सरकार एक बार फिर रसोइयों का मानदेय बढ़ाने की तैयारी कर रही है। इसी क्रम में एमडीएम प्राधिकरण ने शासन को प्रस्ताव भेज दिया है। सूत्रों के मुताबिक उम्मीद है कि जल्द इस पर शासन स्तर से निर्णय ले लिया जाएगा और एक कार्यक्रम आयोजित कर मुख्यमंत्री खुद बढ़े हुए मानदेय का ऐलान कर सकते हैं। यानी अगर सब कुछ योजना के मुताबिक चला तो रसोइयों के लिए यह खबर बहुत जल्द औपचारिक रूप ले सकती है।
चुनाव से पहले बड़े वर्ग को साधने की कोशिश में सरकार
अगले साल की शुरुआत में ही विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में सरकार किसी भी बड़े तबके को नाराज नहीं रखना चाहती। हाल ही में शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों का मानदेय भी बढ़ाया जा चुका है। इसके अलावा सभी शिक्षकों, शिक्षा मित्रों से लेकर रसोइयों तक कैशलेस इलाज की सुविधा भी दी गई है, जिसकी प्रक्रिया अभी चल रही है। रसोइयों की संख्या 3.53 लाख से ज्यादा है और ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्रों में काम करती हैं। इनका मानदेय पिछले पांच साल से नहीं बढ़ा है और लगातार इसके लिए मांग उठती रही है। यही वजह है कि चुनाव से पहले इनका मानदेय बढ़ाकर सरकार बड़े वर्ग को खुश करना चाहती है।
1.46 करोड़ बच्चों तक पहुंचता है मिड-डे मील
प्रदेश में कक्षा 8 तक के सरकारी और एडेड स्कूलों की कुल संख्या 1,41,703 है, जिनमें 1,46,96,104 बच्चों को मिड-डे मील दिया जा रहा है। इतनी बड़ी संख्या में बच्चों तक खाना पहुंचाने की जिम्मेदारी 3,53,536 रसोइयों के कंधों पर है। इनका मानदेय पांच साल से नहीं बढ़ा है, जबकि काम का दायरा और जिम्मेदारी लगातार बनी हुई है। अगर एक हजार रुपये की बढ़ोतरी होती है तो यह 2022 के मुकाबले 50 फीसदी की सीधी बढ़त होगी, जो इस वर्ग के लिए राहत की बड़ी वजह बन सकती है। फिलहाल प्रदेश के मिड-डे मील योजना से जुड़े रसोइयों को मानदेय बढ़ोतरी को लेकर आधिकारिक शासनादेश जारी होने का इंतजार करना चाहिए, क्योंकि अभी तक यह प्रस्ताव अंतिम स्वीकृति के चरण में ही है।










