इग्नू यानी इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय ने 2026 से एक बड़ा बदलाव लागू कर दिया है। अब चार वर्षीय स्नातक ऑनर्स डिग्री पूरी करने वाले छात्रों को मास्टर डिग्री के लिए दो साल तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। यूजीसी की नई व्यवस्था और एनईपी 2020 के तहत इग्नू ने नौ नए एक वर्षीय मास्टर डिग्री कार्यक्रम शुरू किए हैं। यह पहल ऑनलाइन और दूरस्थ शिक्षा माध्यम से चलाई जाएगी और देश में इस तरह की व्यवस्था लागू करने वाला इग्नू पहला विश्वविद्यालय बन गया है। जो छात्र चार साल की ऑनर्स डिग्री कर चुके हैं, उनके लिए यह मौका मास्टर डिग्री को तेजी से पूरा करने का जरिया बनेगा।
किन विषयों में शुरू हुए नए कोर्स
सामाजिक विज्ञान की बात करें तो अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र और इतिहास में एक वर्षीय एमए की सुविधा दी गई है। ध्यान देने वाली बात यह है कि ये पाठ्यक्रम खासतौर पर उन विद्यार्थियों के लिए हैं जिन्होंने चार वर्षीय यूजी ऑनर्स विद रिसर्च ट्रैक से पढ़ाई पूरी की है। वाणिज्य क्षेत्र में बीकॉम ऑनर्स करने वाले छात्रों के लिए एक वर्षीय एमकॉम का विकल्प मिलेगा। पत्रकारिता में रुचि रखने वाले छात्र अब पत्रकारिता एवं जनसंचार में एक वर्षीय एमए कर सकेंगे।
भाषा और मानविकी विषयों में भी विकल्प
मानविकी क्षेत्र में भी इग्नू ने दायरा बढ़ाया है। अंग्रेजी, हिंदी, संस्कृत और उर्दू में एक वर्षीय एमए की सुविधा शुरू की गई है। आप समझ सकते हैं कि यह उन छात्रों के लिए खासतौर पर फायदेमंद रहेगा जो भाषा विषयों में आगे की पढ़ाई करना चाहते हैं। इन कोर्सेज में भी चार वर्षीय यूजी ऑनर्स विद रिसर्च और सामान्य चार वर्षीय यूजी ऑनर्स करने वाले छात्रों के लिए अलग-अलग ट्रैक तय किए गए हैं, ताकि दोनों तरह के विद्यार्थियों को उनकी पात्रता के हिसाब से मास्टर डिग्री तक पहुंचने का रास्ता मिल सके।
पहले क्या था और अब क्या बदल गया
अब तक स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद आमतौर पर दो वर्षीय मास्टर डिग्री ही एकमात्र विकल्प होता था। सीधी बात करें तो नई व्यवस्था इस पुराने ढांचे को लचीला बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। एनईपी 2020 का मकसद ही उच्च शिक्षा को ज्यादा फ्लेक्सिबल और छात्र केंद्रित बनाना है, और इग्नू का यह फैसला उसी नीति को अमल में लाने का उदाहरण है। इग्नू के मुताबिक, जिन छात्रों ने चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम पूरा कर लिया है, वे संबंधित विषय में महज एक साल में मास्टर डिग्री हासिल कर सकेंगे, बशर्ते वे तय पात्रता शर्तों को पूरा करते हों।
छात्रों के लिए इसका क्या फायदा
वैसे देखा जाए तो यह बदलाव उन लाखों छात्रों के लिए राहत की खबर है जो चार वर्षीय ऑनर्स डिग्री के बाद जल्द से जल्द मास्टर डिग्री हासिल करना चाहते हैं। एक साल की बचत का मतलब है कि छात्र समय रहते नौकरी बाजार में उतर सकते हैं या फिर आगे की पढ़ाई, जैसे पीएचडी, जल्दी शुरू कर सकते हैं। ऑनलाइन और दूरस्थ शिक्षा माध्यम होने से उन छात्रों को भी फायदा मिलेगा जो नौकरी करते हुए या किसी वजह से नियमित कैंपस पढ़ाई नहीं कर पा रहे। इग्नू का यह कदम आने वाले समय में अन्य विश्वविद्यालयों के लिए भी एक मॉडल बन सकता है। इग्नू में प्रवेश और पंजीकरण से जुड़ी अपडेट के लिए छात्रों को समय-समय पर विश्वविद्यालय की आधिकारिक जानकारी पर नजर बनाए रखनी चाहिए, क्योंकि कोर्स से जुड़ी पात्रता और आवेदन प्रक्रिया में बदलाव संभव है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि इग्नू द्वारा 1 साल का पोस्ट ग्रेजुएशन का कोर्स केवल 4 वर्षीय स्नातक करने वाले छात्रों के लिए ही शुरू किया गया है 3 वर्षीय ग्रेजुएशन करने वाले छात्रों को एक वर्षीय पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा करने का मौका नहीं मिलेगा उन्हें दो वर्षीय पीजी डिप्लोमा ही करना होगा।










