UPTET में 87-89 अंक वाले को मिल सकता है पास होने का मौका, जानें रिजल्ट नॉर्मलाइजेशन का गणित UPTET Result Normalization 2026

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On: August 1, 2026
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UPTET Result Normalization 2026: उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी UPTET 2026 का रिजल्ट अब जल्द जारी हो सकता है, और लाखों अभ्यर्थियों की धड़कनें तेज हो गई हैं। खास बात यह है कि इस बार यूपीटेट में पहली बार नॉर्मलाइजेशन लागू किया गया है, क्योंकि परीक्षा तीन दिन और कई शिफ्टों में हुई थी। इसी वजह से जिन अभ्यर्थियों के नंबर उत्तर कुंजी के हिसाब से पासिंग मार्क्स के बेहद करीब हैं, यानी एक दो या तीन नंबर से इधर-उधर हैं, उनकी टेंशन सबसे ज्यादा बढ़ी हुई है। बहुत से लोग यह भी नहीं जानते कि नॉर्मलाइजेशन असल में होता क्या है और इसका उनके रिजल्ट पर कैसा असर पड़ सकता है। इस आर्टिकल में हम आपको श्रेणीवार पासिंग मार्क्स, नॉर्मलाइजेशन का पूरा गणित, किसे फायदा और किसे नुकसान हो सकता है, और आने वाले विवाद की आशंका तक हर जरूरी बात आसान भाषा में समझाएंगे।

यूपीटेट में पास होने के लिए कितने नंबर चाहिए

यूपीटेट परीक्षा कुल 150 प्रश्नों की होती है, और हर श्रेणी के लिए पासिंग मार्क्स पहले से तय हैं। सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को पास होने के लिए 60 प्रतिशत यानी 90 अंक लाने जरूरी हैं। वहीं OBC, SC, ST और EWS वर्ग के साथ-साथ दिव्यांग और एक्स-सर्विसमैन कैटेगरी के अभ्यर्थियों के लिए यह सीमा 55 प्रतिशत यानी 82 अंक रखी गई है। यानी सामान्य वर्ग को छोड़कर बाकी सभी श्रेणियों में उत्तीर्ण अंक एक जैसे ही हैं। नीचे दी गई टेबल में यह जानकारी और साफ तरीके से समझी जा सकती है।

श्रेणीअंक प्रतिशतउत्तीर्ण अंक
सामान्य वर्ग60%90 अंक
OBC / SC / ST55%82 अंक
EWS / दिव्यांग / एक्स-सर्विसमैन55%82 अंक

नॉर्मलाइजेशन क्या है और यूपीटेट में पहली बार क्यों लागू हुआ

पहले यूपीटेट का संचालन उत्तर प्रदेश बेसिक एजुकेशन बोर्ड करता था, लेकिन अब यह जिम्मेदारी यूपी एजुकेशन सर्विस सेलेक्शन कमीशन यानी UPESSC को दी गई है। इस बार सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद पहले से कार्यरत नॉट-टेट टीचर्स को भी परीक्षा में बैठने की परमिशन मिली, जिससे अभ्यर्थियों की संख्या अचानक बहुत बढ़ गई। इतने बड़े कैंडिडेट बेस के साथ परीक्षा एक ही दिन में कराना संभव नहीं था, इसलिए यह तीन दिन और अलग-अलग शिफ्टों में कराई गई। जब परीक्षा अलग-अलग शिफ्टों में होती है तो हर शिफ्ट के पेपर का कठिनाई स्तर एक जैसा नहीं रहता, किसी शिफ्ट का पेपर आसान रहता है तो किसी का मुश्किल। इसी असमानता को दूर करने और सभी अभ्यर्थियों को बराबरी का मौका देने के लिए नॉर्मलाइजेशन का गणितीय फॉर्मूला अपनाया जाता है, जिससे हर शिफ्ट के स्कोर को एक समान स्तर पर लाया जा सके।

किनके नंबर बढ़ सकते हैं और किनकी टेंशन बढ़ सकती है

सबसे ज्यादा चर्चा उन अभ्यर्थियों को लेकर है जो पासिंग मार्क्स के बेहद करीब अटके हुए हैं। सामान्य वर्ग के जिन अभ्यर्थियों के उत्तर कुंजी के अनुसार 87, 88 या 89 अंक बन रहे हैं, उनके लिए उम्मीद अभी बाकी है। अगर उनकी शिफ्ट का पेपर बाकी शिफ्टों की तुलना में थोड़ा मुश्किल आंका गया, तो नॉर्मलाइजेशन के बाद उनके दो से चार अंक तक बढ़ सकते हैं और वे 90 अंक की सीमा पार कर सकते हैं। वहीं दूसरी तरफ, जिन आरक्षित या EWS वर्ग के अभ्यर्थियों के अंक 82 से काफी नीचे, जैसे 75 से 77 के बीच हैं, उनके लिए सिर्फ नॉर्मलाइजेशन के भरोसे पास होना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि इतना बड़ा अंतर सिर्फ शिफ्ट के औसत अंतर से पूरा होना आसान नहीं है। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि नॉर्मलाइजेशन से नंबर घट भी सकते हैं, अगर किसी अभ्यर्थी का पेपर आसान शिफ्ट में था और बाकी शिफ्टों का औसत स्कोर ज्यादा रहा, तो एडजस्ट होने के बाद असली अंक से कम स्कोर भी सामने आ सकता है।

नॉर्मलाइजेशन को लेकर विवाद की आशंका क्यों बनी हुई है

नॉर्मलाइजेशन कोई नई चीज नहीं है, SSC, रेलवे और CUET जैसी बड़ी परीक्षाओं में यह पहले से लागू है, लेकिन हर बार इसके फॉर्मूले की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। हाल ही में हुए CUET एग्जाम में भी कई स्टूडेंट्स ने शिकायत की थी कि नॉर्मलाइजेशन के बाद उनके 40 से 50 अंक तक कम हो गए, और कुछ मामलों में यह कमी इससे भी ज्यादा बताई गई। कई छात्रों और शिक्षकों ने एजेंसी से रॉ मार्क्स के साथ-साथ नॉर्मलाइजेशन का पूरा तरीका सार्वजनिक करने की मांग भी की थी। इसी वजह से यूपीटेट अभ्यर्थियों में भी यह डर बना हुआ है कि रिजल्ट आने के बाद फॉर्मूले की पारदर्शिता पर सवाल उठ सकते हैं। हालांकि आयोग की तरफ से पेपर लीक और परीक्षा प्रबंधन को लेकर ज्यादा नियंत्रित सिस्टम अपनाने की कोशिश की गई है, ताकि प्रक्रिया पहले से ज्यादा भरोसेमंद बनाई जा सके।

अभ्यर्थियों को अभी क्या करना चाहिए

रिजल्ट का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के लिए सबसे जरूरी बात यह समझना है कि अब सिर्फ अपनी उत्तर कुंजी के आधार पर बने रॉ स्कोर से अपनी स्थिति का अंदाजा लगाना पहले जितना आसान नहीं रहेगा। जिनके नंबर पासिंग मार्क्स के आसपास हैं, उन्हें रिजल्ट आने तक थोड़ा धैर्य रखना होगा और साथ ही सीटेट जैसी दूसरी परीक्षाओं की तैयारी भी जारी रखनी चाहिए, ताकि कोई विकल्प हाथ से न छूटे। जिनके अंक पासिंग मार्क्स से बहुत नीचे हैं, उनके लिए बेहतर होगा कि वे नॉर्मलाइजेशन पर निर्भर रहने के बजाय अगली परीक्षा की तैयारी पर फोकस करें। रिजल्ट और नॉर्मलाइजेशन से जुड़ी हर नई अपडेट सबसे पहले पाने के लिए आधिकारिक वेबसाइट के साथ-साथ इस पेज को भी समय-समय पर चेक करते रहें।

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Sangam Patel

Sangam Patel is a Content Writer at StaffTak.in. He writes about Teacher Recruitment, Government Jobs, Education News, Scholarships, Admit Cards, Results, and Admissions, providing accurate and reliable updates from official sources.