UP Pre Primary School ECCE Educator :ईसीसीई एजुकेटर जिलेवार नोटिफिकेशन, जानिए कौन बन सकता है एजुकेटर

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On: July 5, 2026
UP Pre Primary School ECCE Educator
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UP Pre Primary School ECCE Educator: उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़े स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में इस समय एक बड़ा बदलाव चल रहा है। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों से जुड़े आंगनबाड़ी केंद्रों को बाल वाटिका में बदलने की प्रक्रिया के तहत 8000 से अधिक ECCE Educator की तैनाती की जा रही है, और इसी प्रक्रिया के अंतर्गत अभी बिजनौर और महाराज गंज के प्री प्राइमरी स्कूलों में तैनाती की प्रक्रिया शुरू की गई  है। यह तैनाती एक चरण में नहीं हो रही, बल्कि जिलों में चरणबद्ध तरीके से चल रही है इसलिए हर जिले में पदों की संख्या और आवेदन की अंतिम तारीख अलग-अलग रखी गई है। शिक्षा विभाग से जुड़े कर्मचारियों और शिक्षकों के लिए यह समझना जरूरी है कि यह भर्ती सिर्फ एक वैकेंसी नहीं, बल्कि स्कूलों के ढांचे में प्री-प्राइमरी शिक्षा को स्थायी रूप से जोड़ने की बड़ी योजना का हिस्सा है।

आंगनबाड़ी और स्कूल के बीच की कड़ी बनेंगे ECCE Educator

दरअसल UP  ECCE Educator का काम सिर्फ पढ़ाना भर नहीं है। इनकी जिम्मेदारी 3 से 6 साल तक के बच्चों को खेल खेल के तरीके से प्रारंभिक साक्षरता और गिनती सिखाने की होती है, ताकि जब यही बच्चे आगे कक्षा एक में पहुंचें तो उनकी बुनियाद पहले से तैयार हो। इसके साथ ही इन्हें बच्चों की सेहत, साफ-सफाई और पोषण से जुड़ी आदतों का भी ध्यान रखना होता है। सबसे खास बात यह है कि ये एजुकेटर आंगनबाड़ी केंद्र और प्राथमिक विद्यालय के बीच एक सेतु की तरह काम करेंगे  जिससे बच्चों का स्कूल में दाखिला और एडजस्टमेंट आसान हो जायेगा चयन की पूरी प्रक्रिया जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली समिति देखती है जिसमें शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा वित्त विभाग के अधिकारी भी शामिल रहते हैं।

जिले अनुसार आवेदन की प्रक्रिया

फिलहाल 2 जिलों में आवेदन प्रक्रिया चल रही है। हर जिले का नोटिफिकेशन अलग है, इसलिए पदों की संख्या और अंतिम तारीख में फर्क है। नीचे टेबल में मौजूदा स्थिति देख कर यह आसानी से जान सकते हैं। बिजनौर जिले के लिए एक्स नोटिफिकेशन जारी किया गया है जिसके अनुसार आवेदन करने की अंतिम तिथि 5 जुलाई है जबकि महाराजगंज में आवेदन करने की अंतिम तिथि 11 जुलाई 2026 रखी गई है अभ्यर्थी अंतिम दिनांक से पहले अप्लाई कर सकते हैं।

योग्यता और आयु सीमा क्या रखी गई है

ध्यान देने वाली बात  महत्वपूर्ण बात यह है कि सभी जिलों में योग्यता एक जैसी रखी गई है। Graduation के साथ NTT या Diploma in Preschool Education को प्राथमिकता दी गई है, आयु सीमा सभी जगह लगभग एक जैसी है, न्यूनतम 21 वर्ष और अधिकतम 40 वर्ष, और आरक्षित वर्ग को नियमानुसार छूट दी जाएगी। आवेदन से पहले अपने जिले का नोटिफिकेशन ध्यान से पढ़ लेना ही ठीक रहेगा क्योंकि छोटी-छोटी शर्तें जिलेवार बदल जाती हैं।

Pre School ECCE Educator चयन कैसे होगा

उत्तर प्रदेश के प्री प्राइमरी स्कूलों में ECCE एजुकेटर लिखित परीक्षा का प्रावधान नहीं है। चयन शैक्षणिक योग्यता के आधार पर बनने वाली मेरिट लिस्ट और दस्तावेज सत्यापन से होगा। अनुभव की अनिवार्यता नहीं रखी गई है इसलिए नए अभ्यर्थी भी इसमें शामिल हो सकते हैं। तैनाती संविदा के आधार पर होगी और काम संतोषजनक रहने पर इसे आगे बढ़ाया जा सकता है। ECCE Educator को मिलने वाले मानदेय की बात की जाए तो चयनित अभ्यर्थियों को लगभग ₹10,313 से ₹10,450 प्रतिमाह तक मानदेय दिया जाएगा। यह भुगतान आउटसोर्स व्यवस्था के तहत संबंधित जिले की प्रक्रिया अनुसार किया जाएगा।

ECCE आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज और प्रक्रिया

ऑनलाइन आवेदन करते समय शैक्षणिक प्रमाण पत्र पहचान पत्र, पासपोर्ट साइज फोटो, हस्ताक्षर, निवास प्रमाण पत्र और आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को जातिगत प्रमाण पत्र भी तैयार रखना होगा। आवेदन से पहले सभी दस्तावेज स्कैन करके रख लें ताकि फॉर्म भरते समय देरी न हो।

  • आवेदन के लिए आधिकारिक वेबसाइट sewayojan.up.nic.in पर जाएं
  • अपने जिले से संबंधित नोटिफिकेशन ध्यान से पढ़ें
  • ऑनलाइन आवेदन लिंक पर क्लिक करें
  • मांगी गई जानकारी और दस्तावेज अपलोड करें
  • फॉर्म की जांच करके सबमिट करें और प्रिंट सुरक्षित रखें

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ECCE एजुकेटर क्या शिक्षक हैं?

ECCE का पूरा नाम Early Childhood Care and Education है। इन शिक्षकों की जिम्मेदारी 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों को खेल-खेल में सीखने का माहौल देना होती है। ये बच्चों में भाष संख्या की शुरुआती समझ, सामाजिक व्यवहार और रचनात्मक गतिविधियों को विकसित करने का काम करते हैं। नई शिक्षा नीति 2020 के तहत शुरुआती शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए ECCE Educator की भूमिका को काफी महत्वपूर्ण माना गया है। भले ही यह शिक्षक की श्रेणी में ना आते हो लेकिन इनका काम शिक्षक कई रहेगा तीन से 6 साल तक के बच्चों के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और इसी से एजुकेटर शिक्षा के साथ-साथ कौशल भी प्रदान करेंगे। इनकी नियुक्ति संविदा पर की जा रही है आउटसोर्सिंग एजेंसी द्वारा चयन किया जा रहा है हालांकि इन एजुकेटर का कार्य संतोषजनक मिलने पर कार्य विस्तार किए जाने की भी सरकार की योजना है। हालांकि अभी नियमितीकरण को लेकर सरकार का कोई प्लान नहीं है।

प्री-प्राइमरी स्कूलों में किन बच्चों को पढ़ाया जाता है?

यूपी के सरकारी प्री-प्राइमरी या बालवाटिका कक्षाओं में आमतौर पर 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को शामिल किया जाता है इन कक्षाओं का उद्देश्य बच्चों को कक्षा 1 में प्रवेश से पहले स्कूल के माहौल के लिए तैयार करना है। यहां पढ़ाई पारंपरिक तरीके से नहीं बल्कि खेल कहानी, चित्र, कविता, गीत और गतिविधियों के माध्यम से कराई जाती है ताकि बच्चों का मानसिक और सामाजिक विकास बेहतर हो सके। बता दे प्री प्राइमरी स्कूलों का संचालन आंगनबाड़ी केंद्रों में किया जा रहा है जिसमें आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और आंगनबाड़ी सहायिका कार्यरत हैं अब ईसीसी एजुकेटर की तेनाली के बाद प्री प्राइमरी स्कूलों में बच्चों की शिक्षा का स्टार और ऊंचा उठेगा।

उत्तर प्रदेश में प्री-प्राइमरी शिक्षा को लेकर क्या है सरकार की योजना?

उत्तर प्रदेश सरकार नई शिक्षा नीति  यानी को NEP 2020 के तहत सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में बालवाटिका और प्री-प्राइमरी शिक्षा को लगातार विस्तार दे रही है। इसी उद्देश्य से ECCE Educator की नियुक्ति, शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराना, बच्चों के लिए गतिविधि आधारित शिक्षा और बुनियादी सीखने की व्यवस्था पर काम सरकार द्वारा किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि कक्षा 1 में प्रवेश से पहले बच्चों की बुनियादी सीखने की क्षमता मजबूत हो और उन्हें बेहतर प्रारंभिक शिक्षा देना है उत्तर प्रदेश सरकार का लक्ष्य अधिक से अधिक प्री प्राइमरी स्कूलों में ECCE एजुकेटर की तैनाती करना है। आने वाले समय में इन प्री प्राइमरी स्कूलों में बड़ी संख्या में रिक्त पदों को भरा जाएगा और बड़ी संख्या में ईसीसीई एजुकेटर की तैनाती की जाएगी।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और ECCE Educator में क्या अंतर है?

उत्तर प्रदेश के प्री प्राइमरी विद्यालयों में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता आंगनवाड़ी सहायिका और ईसीसीई एजुकेटर दोनों के कार्य अलग-अलग हैं जहां आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पोषण टीकाकरण प्रारंभिक शिक्षा जैसे कार्यों को संभाल रही है तो वहीं ईसीसी एजुकेटर 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा के साथ-साथ कौशल प्रधान कर रहे हैं। सरकार का भी प्रमुख उद्देश्य प्री प्राइमरी शिक्षा कोई कौशल परक शिक्षा बनाना है जिससे बच्चे आसानी से और जल्दी तो सीखेंगे ही साथ ही बचपन से ही उनमें कोई ना कोई कौशल विकसित होने की भावना आएगी।

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Sangam Patel

Sangam Patel is a Content Writer at StaffTak.in. He writes about Teacher Recruitment, Government Jobs, Education News, Scholarships, Admit Cards, Results, and Admissions, providing accurate and reliable updates from official sources.