UP Basic School Anudeshak Supreme Court Honorarium: उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत हजारों अनुदेशकों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने ताजा आदेश में उत्तर प्रदेश सरकार की उस रिव्यू पिटीशन को खारिज कर दिया है जो अनुदेशकों के हक में आए फरवरी 2026 के फैसले के खिलाफ दाखिल की गई थी। यह फैसला अनुदेशकों के लिए एक तरह से अंतिम मुहर साबित हुआ है। आगे जानिए पूरा मामला किस तरह शुरू हुआ था और अब आगे क्या होगा। आईए जानते हैं उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत अनुदेशकों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया है और इससे अनुदेशकों के मानदेय और एरिया को लेकर क्या लाभ मिलेगा।
कहां से शुरू हुआ था यह पूरा मामला?
दरअसल उत्तर प्रदेश के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत अंशकालिक अनुदेशकों को वर्षों से बेहद कम मानदेय दिया जा रहा था, जिसे लेकर लंबे समय से कानूनी लड़ाई चल रही थी। अनुदेशकों की तरफ से अनुराग व अन्य ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचाया था। मामला सिविल अपील संख्या 759-764/2026 के तहत सुना गया, जिसमें राज्य सरकार और अनुदेशकों के बीच वर्षों पुराना मानदेय विवाद केंद्र में था। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह विवाद सिर्फ पैसों का नहीं बल्कि अनुदेशकों के सम्मानजनक जीवन जीने के अधिकार से भी जुड़ा हुआ था। अनुदेशक काफी लंबे समय से यह केस लड़ रहे थे हाई कोर्ट होते हुए एक केस पहले भी सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था और एक बार फिर से सुप्रीम कोर्ट पहुंच कर अनुदेशकों को राहत मिली है।
4 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला दिया था?
माननीय सुप्रीम कोर्ट ने 4 फरवरी 2026 को अनुदेशकों के पक्ष में एक बड़ा फैसला सुनाया था। कोर्ट ने साफ कहा था कि अनुदेशकों को ₹17,000 प्रति माह से कम मानदेय देना संविधान के अनुच्छेद 23 यानी शोषण के विरुद्ध अधिकार का उल्लंघन है। कोर्ट ने आदेश दिया था कि अनुदेशकों को वर्ष 2017-18 से अब तक का पूरा बकाया एरियर दिया जाए, और यह भुगतान फैसले की तारीख से छह महीने के भीतर पूरा किया जाए। सीधी बात करें तो कोर्ट ने राज्य सरकार को साफ निर्देश दिया था कि अनुदेशकों का शोषण अब और नहीं चलेगा।
राज्य सरकार ने पहले मान लिया था आदेश फिर गई रिव्यू पिटीशन में
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 7 अप्रैल 2026 की कैबिनेट बैठक में मानदेय ₹17,000 प्रति माह करने की मंजूरी भी दे दी थी, और 1 अप्रैल 2026 से नई दरें लागू भी कर दी गई थीं। लेकिन इसके बावजूद राज्य सरकार इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन लेकर पहुंच गई थी, जिसमें ओपन कोर्ट में पर्सनल हियरिंग की मांग भी की गई थी। आप समझ सकते हैं कि सरकार शायद एरियर वाले हिस्से पर राहत चाहती थी लेकिन कोर्ट ने इस कोशिश को भी सिरे से नकार दिया। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को इस मामले में भी राहत नहीं दी है ऐसे में इस आदेश से अनुदेशकों को बड़ा फायदा हो सकता है क्योंकि काफी लंबे समय से उन्हें एरियर के तौर पर बड़ी रकम मिल सकती है।
अब सुप्रीम कोर्ट ने क्या नया आदेश दिया?
23 जुलाई 2026 को जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की बेंच ने राज्य सरकार की रिव्यू पिटीशन पर सुनवाई की। कोर्ट ने साफ कहा कि पर्सनल हियरिंग की मांग वाली अर्जी खारिज की जाती है, और रिव्यू पिटीशन में ऐसी कोई गलती नहीं मिली जो पुनर्विचार की मांग को जायज ठहराए। वैसे देखा जाए तो कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि 4 फरवरी 2026 के फैसले में कोई त्रुटि नहीं है, इसलिए सभी रिव्यू पिटीशन खारिज कर दी गईं और इससे जुड़ी सभी लंबित अर्जियां भी निस्तारित कर दी गई हैं।
अब अनुदेशकों के लिए क्या है आगे की राह?
सुप्रीम कोर्ट का यह ताजा आदेश अनुदेशकों के लिए राहत की बड़ी वजह बन गया है क्योंकि अब फरवरी वाला फैसला पूरी तरह अंतिम हो गया है, इसमें किसी तरह का बदलाव अब संभव नहीं है। अनुदेशकों को अब ₹17,000 प्रति माह मानदेय के साथ-साथ 2017-18 से अब तक का पूरा बकाया एरियर भी पाने का रास्ता साफ हो गया है। जिन अनुदेशकों को अभी तक एरियर का भुगतान नहीं मिला है, उनके लिए यह आदेश उम्मीद की किरण जैसा है। हनुमान लगाया जाए तो हम देश को 7 से 8 लख रुपए तक एरियर मिल सकता है।
| S.No. | Description | Link |
| 1 | Supreme Court Order (04.02.2026) | Click Here |
| 2 | Review Petition Order (23.07.2026) | Click Here |


