TET Relaxation for in service Teachers by NCTE: शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET को लेकर देशभर के शिक्षकों में जो उलझन चल रही है, वह अब थोड़ी साफ होती दिख रही है। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद यानी NCTE ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में नियुक्ति की तारीख के हिसाब से अलग-अलग बताया है कि किन शिक्षकों पर TET लागू होगी और किन पर नहीं। इस हलफनामे के सामने आने के बाद से हजारों शिक्षकों में यह बहस छिड़ गई है कि आखिर उनकी नौकरी सुरक्षित है या नहीं खासकर तब जब सुप्रीम कोर्ट पहले ही TET को सभी के लिए जरूरी बता चुका है। फिलहाल अभी एक एनसीटीई का शपथ पत्र शिक्षकों के बीच काफी चर्चा में है जिसमें शिक्षकों को तीन श्रेणी में बताते हुए 2010 से पहले के शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य नहीं बताया है।
देशभर में लाखों शिक्षक ऐसे हैं जिनकी नौकरी 2010 से पहले लगी थी। जब से TET की बात जोर पकड़ी, तब से इन शिक्षकों के मन में डर बैठ गया कि अगर उन्होंने TET पास नहीं की तो नौकरी चली जाएगी। कई राज्यों में शिक्षकों ने इसके विरोध में सड़कों पर भी उतरकर प्रदर्शन किया। हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और झारखंड जैसे राज्यों में यह मुद्दा काफी गर्म रहा। अब NCTE के हलफनामे ने इस बहस को एक नई दिशा दे दी है, लेकिन पूरी तस्वीर अभी भी उतनी सीधी नहीं है जितनी दिखती है। आईए जानते हैं एनसीटीई के शपथ पत्र की पूरी जानकारी।
तीन श्रेणियों में बांटकर NCTE ने दिया था जवाब
NCTE ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में शिक्षकों को नियुक्ति की तारीख के आधार पर तीन हिस्सों में बांटा है और हर हिस्से के लिए अलग बात कही है।
3 सितंबर 2001 से पहले नियुक्त शिक्षक: इस तारीख से पहले नौकरी पाने वाले शिक्षकों को TET से पूरी तरह राहत है। NCTE ने साफ कहा है कि सिर्फ TET पास न होने की वजह से इन शिक्षकों की नौकरी पर कोई आंच नहीं आएगी। तर्क यह है कि जब ये नियुक्तियां हुई थीं, उस वक्त TET जैसी कोई व्यवस्था थी ही नहीं, तो बाद में बने नियम उन पर नहीं थोपे जा सकते।
3 सितंबर 2001 से 23 अगस्त 2010 के बीच नियुक्त शिक्षक: इस दौरान नौकरी पाने वाले शिक्षकों के लिए भी TET अनिवार्य नहीं थी, क्योंकि उस समय यह परीक्षा अस्तित्व में ही नहीं आई थी। NCTE विनियम 2001 के तहत जो नियुक्तियां हुई थीं, वे उस वक्त के नियमों के हिसाब से पूरी तरह वैध हैं और उन पर बाद के नियम नहीं लगाए जा सकते।
23 अगस्त 2010 के बाद नियुक्त शिक्षक: इस तारीख को NCTE ने अधिसूचना जारी करके कक्षा 1 से 8 तक के शिक्षकों की नियुक्ति के लिए TET को जरूरी घोषित किया था। इसके बाद नियुक्त हर शिक्षक के लिए TET पास करना पूरी तरह अनिवार्य है, इसमें कोई छूट नहीं मिलेगी।
इसी बीच एक बात साफ कर देना चाहते हैं कि एनसीटीई द्वारा दिया गया शपथ पत्र जिसमें शिक्षकों को तीन श्रेणियां में विभाजित है यह शपथ पत्र सुप्रीम कोर्ट आदेश से पहले दिया गया था और इसके बाद ही सुप्रीम कोर्ट ने अपना निर्णय सुनाया था जिसमें शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य बताया था सुप्रीम कोर्ट ने एनसीटीई के इस शपथपत्र को नकार दिया था और 2017 के संशोधन को मानते हुए सभी शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य कर दिया है।
NCTE के हलफनामे की मुख्य बातें
NCTE ने सुप्रीम कोर्ट में दीवानी अपील संख्या 1385/2025 में 5 मार्च 2025 को यह हलफनामा दाखिल किया। इसमें कही गई अहम बातें इस प्रकार हैं:
- 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET से उसी अधिसूचना के पैरा 1 के तहत छूट दी गई थी।
- NCTE विनियम 2014 (12 नवंबर 2014) के मुताबिक भर्ती के साथ-साथ पदोन्नति के लिए भी TET अनिवार्य है।
- कक्षा 1 से 8 तक के शिक्षकों की नियुक्ति के मामले में किसी भी स्तर पर कोई छूट नहीं दी जाएगी।
- 03.09.2001 से पहले और 03.09.2001 से 23.08.2010 के बीच नियुक्त शिक्षक नियुक्ति में तो बाध्य नहीं हैं, लेकिन पदोन्नति के लिए TET जरूरी होगी।
- केंद्र सरकार ने TET पास करने की शर्त में किसी भी प्रकार की कोई छूट नहीं दी है।
सुप्रीम कोर्ट पहले ही दे चुका है TET पास करने का आदेश
यह भी समझना जरूरी है कि NCTE का यह हलफनामा आने के बाद भी सुप्रीम कोर्ट सितंबर 2025 में ही सभी कार्यरत शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य कर चुका है। उस फैसले में 2 साल की डेडलाइन दी गई थी यानी 31 अगस्त 2027 तक TET पास करनी थी। इसके बाद कई राज्य सरकारों और शिक्षक संगठनों ने रिव्यू पिटीशन दाखिल की और TET से पूरी तरह छूट मांगी। सुनवाई के दौरान तमिलनाडु सरकार ने कहा कि इस फैसले से अकेले उनके राज्य में चार लाख से ज्यादा शिक्षक प्रभावित होंगे और स्कूल खाली हो जाएंगे। इस पर न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता ने कहा कि बच्चों को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अधिकार है और शिक्षक सिर्फ अपनी नौकरी की चिंता न करें। सुप्रीम कोर्ट ने TET से छूट देने से साफ इनकार कर दिया, लेकिन डेडलाइन एक साल बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दी। देशभर में करीब 30 लाख और अकेले उत्तर प्रदेश में 2 लाख से ज्यादा शिक्षक अभी TET पास नहीं हैं।
तो क्या NCTE के हलफनामे से शिक्षकों को छूट मिली?
यही वह सवाल है जो इस पूरे विवाद की जड़ में है। NCTE ने जो हलफनामा दिया है उसमें पुरानी नियुक्तियों को गैरकानूनी नहीं बताया गया है, यह बात सही है। लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं निकाला जा सकता कि अब कार्यरत शिक्षकों को TET पास नहीं करनी होगी। सुप्रीम कोर्ट का आदेश सबसे ऊपर है और वह पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि 31 अगस्त 2028 तक हर कार्यरत शिक्षक को TET पास करनी होगी, चाहे उनकी नियुक्ति किसी भी साल हुई हो। NCTE का हलफनामा यह जरूर साफ करता है कि पुरानी नियुक्तियां उस वक्त के नियमों के तहत वैध थीं, लेकिन नौकरी बचाए रखने के लिए TET पास करना अब हर शिक्षक की मजबूरी है। जो शिक्षक यह सोच रहे हैं कि NCTE के हलफनामे से उन्हें TET से पूरी तरह बचने का रास्ता मिल गया है, उनके लिए यह समझना जरूरी है कि एनसीटीई का यह शपथ पत्र 2025 में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया गया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस कल्पना में दी गई टेट छूट को मारने से इनकार कर दिया था और इसके बाद 2017 में जो संशोधन किया गया था और शिक्षकों को ट पास करने का 2 वर्ष का समय दिया गया था इस प्रकार सुप्रीम कोर्ट का आदेश आज भी प्रभावी है फिलहाल शिक्षकों को 28 अगस्त 2027 तक TET पास करने का समय मिला है हां अगर इस केस की सुनवाई एक बार फिर लार्जर बेंच में होती है हमको कोई समाधान निकाल सकता है फिलहाल अभी सभी शिक्षकों को TET पास करना होगा क्योंकि सुप्रीम कोर्ट एनसीटीई के इस शपथ पत्र को नकार चुका है और इस शपथ पत्र का अब कोई मतलब नहीं बचा है।



