Mukhyamantri Bal Seva Yojana: उत्तर प्रदेश के अनाथ और असहाय बच्चों के लिए योगी सरकार की एक योजना बड़ा सहारा बन रही है। इस योजना का नाम है मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (सामान्य), और यह उन बच्चों के लिए है जिन्होंने अपने माता-पिता को खो दिया है या जो मुश्किल हालात में जिंदगी गुजार रहे हैं। सरकार का साफ मकसद है कि पैसों की कमी की वजह से किसी भी बच्चे की पढ़ाई और अच्छे भविष्य पर कोई असर न पड़े। इसी सोच के साथ शुरू की गई इस योजना में बच्चों के बचपन से लेकर उनकी आगे की पढ़ाई तक पैसों की मदद देने का पूरा इंतजाम किया गया है।
Mukhyamantri Bal Seva Yojana Overview
| Scheme Name | Mukhyamantri Bal Seva Yojana (Samanya) |
| State | Uttar Pradesh |
| किसे मिलेगा फायदा | अनाथ और असहाय बच्चे |
| मदद की उम्र सीमा | 18 से 23 साल तक |
| हर महीने मिलने वाली रकम | 2500 रुपये |
| अब तक लाभान्वित बच्चे | 1,09,539 से ज्यादा |
| अपडेट की तारीख | 2 अगस्त 2026 |
12वीं के बाद भी मिलती रहेगी मदद, जानें पूरी शर्त
इस योजना की सबसे खास बात यह है कि सरकार की मदद सिर्फ स्कूल की पढ़ाई तक सीमित नहीं है। जो अनाथ बच्चे 12वीं पास करने के बाद ग्रेजुएशन या किसी डिप्लोमा कोर्स में दाखिला लेते हैं, उन्हें 18 से 23 साल की उम्र तक हर महीने 2500 रुपये की मदद दी जाती है। यह पैसा बच्चे के 23 साल पूरे होने तक या उसका कोर्स खत्म होने तक, इन दोनों में से जो भी पहले हो, तब तक लगातार मिलता रहता है। इसका मतलब यह है कि अगर कोई बच्चा 18 साल की उम्र में ग्रेजुएशन शुरू करता है तो उसे कई साल तक हर महीने यह रकम मिल सकती है, जिससे वह बिना पैसों की चिंता किए अपनी पढ़ाई पूरी कर सके। सरकार का मानना है कि इस तरह की लगातार मदद से बच्चों का मानसिक तनाव भी कम होता है और वे पढ़ाई पर पूरा ध्यान दे पाते हैं।
1 लाख से ज्यादा बच्चों तक पहुंची यह मदद
योगी सरकार की इस योजना का दायरा उत्तर प्रदेश में तेजी से बढ़ रहा है। अभी तक राज्य के 1,09,539 से ज्यादा बच्चे इस योजना के तहत लगातार पैसों की मदद पा रहे हैं। इस मदद से बच्चों के पालन-पोषण, अच्छी पढ़ाई, सही पोषण और रोज की जरूरतों को पूरा करने में सीधी मदद मिल रही है। इसके अलावा इस योजना का एक और बड़ा फायदा यह भी है कि जो परिवार इन बच्चों की देखभाल कर रहे हैं, उन पर पड़ने वाला पैसों का बोझ भी काफी हद तक कम हुआ है। पहले ऐसे परिवारों को बच्चों की पढ़ाई और परवरिश का पूरा खर्च खुद उठाना पड़ता था, लेकिन अब सरकार की इस मदद से उन्हें भी राहत मिली है। इससे बच्चों की देखभाल करने वाले परिवार भी बच्चों को बेहतर तरीके से पाल पाने में सक्षम हो रहे हैं।
बच्चों को सम्मान के साथ आगे बढ़ने का मिल रहा मौका
मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना यह दिखाती है कि सरकार बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों को लेकर पूरी गंभीरता से काम कर रही है। इसका मकसद यह है कि उत्तर प्रदेश का हर जरूरतमंद बच्चा अपने पैरों पर खड़ा हो सके और सम्मान के साथ आगे बढ़ सके। पहले ऐसे बच्चों को अक्सर आर्थिक तंगी की वजह से पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ती थी, लेकिन अब इस तरह की लगातार मदद मिलने से उन्हें भी दूसरे बच्चों की तरह पढ़ने और अपने सपने पूरे करने का मौका मिल रहा है। हाल में इस योजना से जुड़ी खबरों में यह भी बताया गया है कि अब इसके लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी शुरू कर दी गई है, जिससे परिवारों को दफ्तरों के चक्कर कम लगाने पड़ें। इस बदलाव से माना जा रहा है कि आने वाले समय में और भी ज्यादा जरूरतमंद बच्चों तक यह मदद आसानी से पहुंच सकेगी।
कैसे मिलेगा फायदा, जानें आवेदन का पूरा तरीका
इस योजना का फायदा लेने के लिए सबसे पहले बच्चे और मौजूदा अभिभावक की नई फोटो के साथ पूरा आवेदन पत्र भरना होता है। इसके साथ माता या पिता या दोनों का मृत्यु प्रमाण पत्र, बच्चे का आयु प्रमाण पत्र (परिवार रजिस्टर की कॉपी या कोई भी सरकारी कागज जिसमें उम्र लिखी हो), जिस शिक्षण संस्थान में बच्चा पढ़ रहा है वहां का पंजीयन प्रमाण पत्र, उत्तर प्रदेश का निवासी होने का घोषणा पत्र और आय प्रमाण पत्र जमा करना होता है। अगर बच्चे के माता-पिता दोनों की मृत्यु हो चुकी है तो आय प्रमाण पत्र देना जरूरी नहीं है। यह पूरा फॉर्म आवेदक ग्रामीण इलाके में ग्राम विकास अधिकारी, ग्राम पंचायत अधिकारी या ब्लॉक कार्यालय में जमा कर सकता है, जबकि शहरी इलाके में यह फॉर्म तहसील या जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय में जमा किया जाता है। फॉर्म जमा होने के बाद संबंधित अधिकारी उसकी जांच करते हैं और सारी शर्तें पूरी होने पर आवेदन को मंजूरी मिल जाती है। मंजूरी मिलने के बाद पैसा सीधे बच्चे के उस बैंक खाते में भेजा जाता है जो बच्चे के आधार से लिंक हो और जिसमें DBT यानी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर की सुविधा चालू हो।


