Maternity Leave New Rules For UP Female Employees: उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य की महिला कर्मचारियों को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। अब मातृत्व अवकाश का लाभ लेने के लिए दो बच्चों की उम्र के बीच दो साल का अंतर होना अनिवार्य नहीं रह गया है। यह बदलाव इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के एक आदेश के बाद किया गया है, जिसके बाद प्रदेश सरकार ने कैबिनेट बाई सर्कुलेशन के माध्यम से इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। अब तक नियम यह था कि दूसरे बच्चे के जन्म के समय दोनों बच्चों की उम्र में कम से कम दो साल का अंतर होना जरूरी था, और इस शर्त के पूरा न होने पर महिला कर्मचारियों को मातृत्व अवकाश देने से इनकार कर दिया जाता था। इस नियम की वजह से लंबे समय से कई महिला कर्मचारियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था, और अब सरकार के इस फैसले के बाद उन्हें राहत मिलने की उम्मीद है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद बदला मातृत्व अवकाश का नियम
यह मामला तब सामने आया जब एक महिला कर्मचारी को दो साल से कम अंतर वाले नियम के आधार पर मातृत्व अवकाश देने से मना कर दिया गया था। इस पर महिला कर्मचारी इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ पहुंची, जहां कोर्ट ने पुराने नियम के आधार पर किए गए इनकार को गलत ठहराया। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि सिर्फ दो बच्चों के बीच उम्र का अंतर दो साल से कम होने की वजह से किसी महिला कर्मचारी को मातृत्व अवकाश जैसे बुनियादी अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने संबंधित महिला कर्मचारी को मातृत्व अवकाश देने के साथ-साथ उससे जुड़े सभी परिणामी लाभ भी प्रदान करने का आदेश दिया। इस फैसले के बाद यह साफ हो गया था कि पुराना नियम अब व्यावहारिक और कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं रह गया है, जिसके चलते सरकार को नियम में संशोधन करना पड़ा।
अब दो साल से कम अंतर होने पर भी मिलेगा अवकाश
हाईकोर्ट के आदेश के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मातृत्व अवकाश के नियम में मौजूद दो साल के अंतर की शर्त को पूरी तरह समाप्त करने का फैसला किया। यह मंजूरी कैबिनेट बाई सर्कुलेशन के जरिए दी गई, जिसका मतलब है कि इस प्रस्ताव को औपचारिक कैबिनेट बैठक के बजाय सर्कुलेशन प्रक्रिया के माध्यम से मंजूरी दी गई। अब इस बदलाव के बाद अगर किसी महिला कर्मचारी के दूसरे बच्चे और पहले बच्चे की उम्र के बीच दो साल से कम का अंतर है, तो भी वह मातृत्व अवकाश की पात्र होगी। इससे पहले तक ऐसी स्थिति में महिला कर्मचारियों को विभागीय स्तर पर आपत्ति और अवकाश स्वीकृत न होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता था, जिसकी वजह से कई बार उन्हें कानूनी सहारा लेना पड़ता था।
महिला कर्मचारियों को मिलेगी बड़ी राहत
सरकार के इस फैसले को महिला कर्मचारियों के अधिकारों की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। अब तक जो महिलाएं दो साल के अंतर की शर्त पूरी न कर पाने की वजह से मातृत्व अवकाश से वंचित रह जाती थीं, उन्हें अब यह सुविधा आसानी से मिल सकेगी। इस बदलाव से न सिर्फ महिला कर्मचारियों को राहत मिलेगी, बल्कि विभागीय स्तर पर मातृत्व अवकाश को लेकर होने वाले अनावश्यक विवाद और भ्रम की स्थिति भी काफी हद तक कम होने की उम्मीद है। पहले जहां हर मामले में उम्र के अंतर की जांच और उसके आधार पर आपत्ति दर्ज होने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था, वहीं अब यह प्रक्रिया सरल हो जाएगी और महिला कर्मचारियों को अपने अधिकार के लिए बार-बार कोर्ट या विभाग के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। कुल मिलाकर इस फैसले को महिला कर्मचारियों के मातृत्व अधिकारों को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।









