Iincome Tax Return filing for Government Employees: इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR भरने की डेडलाइन को लेकर अब ज्यादा वक्त नहीं बचा है। 31 जुलाई 2026 आखिरी तारीख है और अभी से सिर्फ पांच हफ्ते बाकी हैं। सरकारी कर्मचारियों और टीचर्स के लिए यह खबर खासतौर पर अहम है, क्योंकि सैलरी से TDS कटने के बाद ज्यादातर मामलों में रिफंड क्लेम करने के लिए ITR भरना जरूरी होता है। अच्छी बात यह है कि इनकम टैक्स पोर्टल पहले के मुकाबले काफी आसान हो गया है और अगर आपके पास Form 16, PAN, आधार और बैंक डिटेल्स तैयार हैं, तो CA की मदद के बिना खुद ही करीब 30 मिनट में रिटर्न फाइल किया जा सकता है। आखिरी दिनों में पोर्टल पर लोड बढ़ने से दिक्कत आ सकती है, इसलिए तैयारी अभी से शुरू कर देना बेहतर रहेगा।
ITR होता क्या है और सरकारी कर्मचारियों के लिए क्यों जरूरी है?
ITR यानी Income Tax Return एक ऐसा फॉर्म है, जिसके जरिए हर टैक्सपेयर साल भर की अपनी कमाई, उस पर कटे टैक्स और अगर ज्यादा टैक्स कट गया हो तो रिफंड की जानकारी सरकार को देता है। टीचर्स और सरकारी कर्मचारियों के मामले में अक्सर सैलरी से TDS कट जाता है, और सही रिफंड पाने के लिए रिटर्न फाइल करना जरूरी हो जाता है। इसके अलावा ITR सिर्फ टैक्स तक सीमित नहीं है, बल्कि इन कामों में भी सीधा काम आता है –
- होम लोन या पर्सनल लोन के आवेदन में इनकम प्रूफ के तौर पर
- वीजा अप्लाई करते समय जरूरी दस्तावेज के रूप में
- सरकारी योजनाओं या स्कॉलरशिप के सत्यापन में
- आगे चलकर इनकम टैक्स नोटिस से बचने के लिए
किन लोगों के लिए ITR भरना अनिवार्य है?
नीचे दी गई किसी भी स्थिति में आप आते हैं, तो ITR भरना आपके लिए जरूरी हो जाता है –
- आपकी आय बेसिक एग्जेम्पशन लिमिट से ज्यादा है
- सैलरी से TDS कटा है और रिफंड लेना चाहते हैं
- करंट अकाउंट में ₹1 करोड़ से ज्यादा जमा किया है
- विदेश यात्रा पर ₹2 लाख से अधिक खर्च हुआ है
- बिजली बिल ₹1 लाख से ज्यादा आता है
- शेयर, म्यूचुअल फंड या प्रॉपर्टी बेचकर कैपिटल गेन हुआ है
रिटर्न भरने से पहले ये डॉक्युमेंट जरूर तैयार रखें
ITR फाइल करने से पहले अगर सारे डॉक्युमेंट पहले से तैयार रहें, तो पूरा प्रोसेस बिना रुकावट सिर्फ आधे घंटे में पूरा हो जाता है। कौन सा डॉक्युमेंट किस काम आता है, इसे नीचे टेबल में देखें –
| डॉक्युमेंट | इसकी जरूरत क्यों है |
|---|---|
| Form 16 | सैलरी और TDS की पूरी जानकारी देता है |
| AIS | सभी इनकम और निवेश का विस्तृत रिकॉर्ड दिखाता है |
| Form 26AS | TDS और टैक्स क्रेडिट का स्टेटस बताता है |
| बैंक स्टेटमेंट | ब्याज से हुई इनकम जांचने के लिए जरूरी |
| निवेश प्रमाण | Old Tax Regime में डिडक्शन क्लेम करने के लिए |
एक जरूरी टिप यह है कि Form 16 में दी गई जानकारी को AIS और Form 26AS से जरूर मिला लें, ताकि बाद में किसी गड़बड़ी की वजह से नोटिस न आए।
स्टेप 1- इनकम टैक्स पोर्टल पर लॉगिन करें
सबसे पहले incometax.gov.in वेबसाइट खोलें और अपने PAN नंबर तथा पासवर्ड से लॉगिन करें। पहली बार पोर्टल इस्तेमाल कर रहे हैं तो रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। ध्यान रहे कि लॉगिन के लिए PAN और आधार का लिंक होना जरूरी शर्त है, बिना इसके पोर्टल पर आगे की प्रक्रिया अटक सकती है।
स्टेप 2- AIS और Form 26AS को बारीकी से चेक करें
यही वह जगह है जहां सबसे ज्यादा गलतियां होती हैं। पोर्टल पर लॉगिन करने के बाद AIS यानी Annual Information Statement और Form 26AS को ध्यान से खोलकर देखें। अगर इनमें और आपके Form 16 में कोई अंतर नजर आए, तो पहले उसकी वजह समझें, उसके बाद ही आगे बढ़ें। गलत जानकारी के आधार पर रिटर्न भर देने पर बाद में नोटिस आ सकता है या फिर रिवाइज्ड रिटर्न भरने की नौबत आ जाती है, जो एक अलग सिरदर्द है।
स्टेप 3- अपने लिए सही ITR फॉर्म चुनें
फॉर्म का चुनाव गलत हो जाए तो रिटर्न को डिफेक्टिव माना जा सकता है, इसलिए यह स्टेप काफी अहम है। अपनी इनकम के सोर्स के मुताबिक सही फॉर्म चुनने के लिए नीचे की टेबल देखें –
| फॉर्म | किसके लिए उपयुक्त है |
|---|---|
| ITR-1 | सैलरी इनकम, कुल आय ₹50 लाख तक |
| ITR-2 | कैपिटल गेन या एक से ज्यादा प्रॉपर्टी रखने वालों के लिए |
| ITR-3 | बिजनेस या प्रोफेशन से जुड़ी इनकम वालों के लिए |
| ITR-4 | Presumptive Business Income वालों के लिए |
ज्यादातर टीचर्स और सरकारी कर्मचारी, जिनकी इनकम सिर्फ सैलरी से आती है, उनके लिए सामान्यतः ITR-1 फॉर्म ही काम आता है, बशर्ते दूसरी शर्तें लागू न हो रही हों।
स्टेप 4- Old Tax Regime चुनें या New Tax Regime?
मौजूदा समय में New Tax Regime डिफॉल्ट सेट है, यानी अगर आप कुछ नहीं चुनते तो पोर्टल खुद ही इसे लागू कर देगा। अगर आपके पास होम लोन, LIC, PPF, ELSS, 80C या 80D जैसी बड़ी छूट क्लेम करने का मौका नहीं है, तो New Regime ज्यादा फायदेमंद रह सकती है। लेकिन अगर इन डिडक्शन के जरिए टैक्स में बड़ी बचत हो रही है, तो Old Regime बेहतर विकल्प बन सकती है। सबसे सुरक्षित तरीका यह है कि पोर्टल पर मौजूद Tax Calculator में दोनों रिजीम के हिसाब से टैक्स कैलकुलेट करके देख लें, इससे फैसला लेना आसान हो जाता है।
स्टेप 5- ऑटो-फिल्ड डिटेल्स को ध्यान से जांचें
इनकम टैक्स पोर्टल अब कई जानकारियां पहले से ही भर देता है, जिससे काम कुछ आसान हो जाता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आंख बंद करके आगे बढ़ जाएं। इन पॉइंट्स को जरूर दोबारा चेक करें –
- सैलरी डिटेल्स सही दर्ज हुई हैं या नहीं
- TDS का अमाउंट Form 16 से मैच कर रहा है या नहीं
- बैंक से मिली इंटरेस्ट इनकम दर्ज है या नहीं
- बैंक अकाउंट डिटेल्स सही और वेरिफाइड हैं
- कैपिटल गेन की एंट्री सही हुई है या नहीं
- पर्सनल डिटेल्स में कोई गलती तो नहीं रह गई
रिटर्न भरने के बाद e-Verification जरूर करें
ITR सबमिट कर देने के बाद भी काम पूरा नहीं होता। उसे आधार OTP, नेट बैंकिंग या डिजिटल सिग्नेचर के जरिए e-Verify करना अनिवार्य है। अगर सबमिट करने के 30 दिन के भीतर e-Verification नहीं किया गया, तो आपका रिटर्न अमान्य मान लिया जाएगा और पूरी मेहनत बेकार चली जाएगी। इसलिए सबमिट करने के तुरंत बाद ही यह स्टेप पूरा कर लेना सही रहता है।
ITR भरते समय इन गलतियों से बचें
हर साल बड़ी संख्या में टैक्सपेयर्स छोटी-छोटी गलतियों की वजह से नोटिस या रिवाइज्ड रिटर्न के झंझट में फंस जाते हैं। नीचे दी गई गलतियों से बचकर ऐसी परेशानी से बचा जा सकता है –
- AIS और Form 26AS चेक किए बिना सीधे रिटर्न भर देना
- अपनी इनकम कैटेगरी के हिसाब से गलत ITR फॉर्म चुन लेना
- बैंक अकाउंट को वेरिफाई न करना
- किसी इनकम सोर्स को छिपाकर रिटर्न भरना
- रिटर्न भरकर e-Verification करना भूल जाना
इन पांच गलतियों में से चार पूरी तरह टाली जा सकती हैं, बस जरूरत है थोड़ी सावधानी और सही क्रम में काम करने की।
समय पर ITR फाइल करने का सीधा फायदा
ITR भरना अब उतना मुश्किल काम नहीं रहा, जितना पहले समझा जाता था। अगर इनकम सामान्य है और दस्तावेज पहले से तैयार हैं, तो किसी एक्सट्रा खर्च के बिना खुद ही रिटर्न फाइल किया जा सकता है। 31 जुलाई की डेडलाइन का इंतजार करने के बजाय जितनी जल्दी रिटर्न भरा जाए, उतनी ही जल्दी कोई गलती सुधारने का मौका मिलता है और रिफंड भी तेजी से अकाउंट में आ जाता है।
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