EPFO Rules Change: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO ने साल 2026 में एक के बाद एक कई बड़े बदलाव किए हैं, जिसका सीधा असर करोड़ों पीएफ खाताधारकों पर पड़ने वाला है। इन बदलावों में EPF, EPS और EDLI स्कीम से जुड़े नियम शामिल हैं। इनका मकसद पीएफ के नियमों को आसान बनाना, पैसा निकालने की प्रक्रिया को सरल करना, पूरे सिस्टम को डिजिटल करना और जवाबदेही को मजबूत करना है। यह बदलाव कर्मचारियों को मिलने वाले सामाजिक सुरक्षा लाभ को सुरक्षित रखते हुए उन्हें होने वाली परेशानियों को भी कम करते हैं। नीचे विस्तार से जानिए EPFO की ओर से किए गए सभी बड़े बदलावों की पूरी जानकारी और इनका कर्मचारियों पर क्या असर पड़ेगा।
PF में हुए 8 बड़े बदलाव
| क्र.सं. | बदलाव | नया नियम |
|---|---|---|
| 1 | कंट्रीब्यूशन | 12% योगदान बरकरार, न्यूनतम 1800 रुपये अनिवार्य |
| 2 | वेतन लिमिट | अब सरकार नोटिफाई सीमा से तय होगी, बार-बार संशोधन आसान |
| 3 | विड्रॉल कैटेगरी | अब सिर्फ 3 कैटेगरी – इमरजेंसी, घर, खास स्थिति |
| 4 | अकाउंट स्ट्रक्चर | 25% राशि सुरक्षित, 75% आंशिक निकासी के लिए |
| 5 | सर्विस अवधि | निकासी के लिए न्यूनतम 12 महीने की सेवा जरूरी |
| 6 | क्लेम सेटलमेंट | अब सिर्फ 20 दिन में होगा निपटारा |
| 7 | नॉमिनेशन | फिजिकल की जगह अब सिर्फ ऑनलाइन नॉमिनेशन मान्य |
| 8 | वेटिंग टाइम | पूरी निकासी के लिए अब 12 महीने बेरोजगारी जरूरी |
विड्रॉल और क्लेम सेटलमेंट में क्या हुआ बदलाव
EPFO ने पीएफ निकासी से जुड़े नियमों को पहले से काफी सरल बना दिया है। पहले अलग-अलग वजहों से निकासी के लिए अलग-अलग शर्तें होती थीं, लेकिन अब इन सभी को सिर्फ तीन कैटेगरी में बांट दिया गया है, जिसमें इमरजेंसी, घर से जुड़ी जरूरतें और खास स्थितियां शामिल हैं। इससे आंशिक निकासी के लिए आवेदन करना पहले से आसान हो गया है। इसके साथ ही पीएफ दावों के निपटारे की समय सीमा भी घटाकर सिर्फ 20 दिन कर दी गई है। अगर बिना किसी वैध कारण के क्लेम में देरी होती है तो EPFO को सदस्य को 12% दंडात्मक ब्याज देना होगा, और यह राशि संबंधित क्षेत्रीय पीएफ आयुक्त के वेतन से काटी जाएगी। इस नियम से क्लेम निपटाने में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
नए पीएफ अकाउंट स्ट्रक्चर और नॉमिनेशन को लेकर क्या है नया नियम
पीएफ खाते की संरचना में भी बड़ा बदलाव किया गया है। अब EPFO सदस्य के खाते को दो हिस्सों में बांटकर रखेगा, जिसमें खाते में जमा कुल राशि का 25% हिस्सा न्यूनतम राशि के तौर पर सुरक्षित रहेगा, जबकि बाकी बचे 75% हिस्से का इस्तेमाल तय शर्तों के तहत आंशिक निकासी के लिए किया जा सकेगा। इसके अलावा डिजिटलाइजेशन को बढ़ावा देने के लिए फिजिकल नॉमिनेशन लेटर को धीरे-धीरे पूरी तरह बंद कर दिया गया है और अब ऑनलाइन नॉमिनेशन को ही औपचारिक मान्यता दी गई है। इस बदलाव से सदस्यों और कंपनियों दोनों के लिए पूरी प्रक्रिया तेज होगी और कागजी कार्रवाई में भी काफी कमी आएगी, जिससे समय की बचत होगी।
वेटिंग टाइम और बेरोजगारी के दौरान निकासी के नियम
रोजगार छोड़ने के बाद पीएफ निकासी के नियमों में भी संशोधन किया गया है। पहले कोई सदस्य दो महीने तक बेरोजगार रहने के बाद अपनी पूरी पीएफ राशि निकाल सकता था, लेकिन नए नियमों के तहत अब पूरी निकासी सिर्फ 12 महीने की बेरोजगारी के बाद ही की जा सकेगी। हालांकि इस दौरान आंशिक निकासी की सुविधा पहले की तरह उपलब्ध रहेगी, लेकिन इसके लिए वेटिंग टाइम बढ़ाकर 36 महीने कर दिया गया है। इसके साथ ही निकासी के लिए एकसमान सर्विस अवधि भी लागू की गई है, जिसके तहत सदस्यों को निकासी से पहले आमतौर पर 12 महीने की सेवा पूरी करनी होगी। चिकित्सा कारणों से निकासी के लिए भी यही न्यूनतम 12 महीने की सेवा शर्त लागू रहेगी।
बता दें कि कंट्रीब्यूशन नियम में फिलहाल कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है और कर्मचारी व कंपनी दोनों का पीएफ योगदान 12% पर ही बना हुआ है। जिन कर्मचारियों की बेसिक सैलरी 15,000 रुपये तक है, उनके लिए कम से कम 1800 रुपये का योगदान अनिवार्य है, जबकि इससे ज्यादा योगदान करना पूरी तरह कर्मचारी की मर्जी पर निर्भर करता है। हालांकि खबर यह भी है कि सरकार भविष्य में इस सैलरी लिमिट को बढ़ाकर 25,000 रुपये तक कर सकती है। वेतन सीमा को लेकर भी अब सीधे 15,000 रुपये का जिक्र न कर सरकार द्वारा समय-समय पर नोटिफाई की जाने वाली सीमा का हवाला दिया गया है, जिससे भविष्य में जरूरत पड़ने पर बिना पूरी योजना में संशोधन किए वेतन सीमा बदली जा सकेगी।


