UP TGT Recruitment New Rules : उत्तर प्रदेश के 4512 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) के 17740 पदों पर लंबे समय से चला आ रहा गतिरोध अब खत्म हो गया है। शासन ने टीजीटी की शैक्षिक अर्हता में संशोधन करते हुए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य कर दिया है। संशोधन के साथ ही उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को टीईटी दोबारा जल्द कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। दूसरी तरफ सरकार ने अभ्यर्थियों को राहत देते हुए यह व्यवस्था की है कि नई भर्ती में चयनित होने वाले उम्मीदवार 30 जून 2027 तक टीईटी उत्तीर्ण कर सकेंगे। इस पूरे फैसले का सीधा असर प्रदेश के हजारों टीजीटी अभ्यर्थियों पर पड़ेगा।
सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में 17740 पदों का रुका रास्ता खुला
प्रदेश के सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में टीजीटी के 17740 पदों पर भर्ती काफी समय से अटकी हुई थी। अर्हता को लेकर नियमावली में संशोधन की स्थिति साफ न होने के कारण भर्ती का विज्ञापन आगे नहीं बढ़ पा रहा था। अब शासन के विशेष सचिव डॉ. अशोक कुमार कनौजिया की ओर से बुधवार को संशोधन जारी कर दिया गया है, जिससे यह गतिरोध समाप्त हो गया है। संशोधन में टीजीटी की अर्हता तय कर दी गई है और इसमें टीईटी को पहली बार अनिवार्य शर्त के रूप में जोड़ा गया है। बताया गया है कि नियमावली संशोधन के बाद टीईटी कराने में कम से कम तीन महीने का समय लग जाएगा और उसके बाद ही टीजीटी भर्ती का विज्ञापन जारी किया जाएगा।
स्नातक में 50 प्रतिशत और बीएड के साथ उच्च प्राथमिक टीईटी जरूरी
संशोधित अर्हता के मुताबिक अभ्यर्थी के पास संबंधित विषय से स्नातक में कम से कम 50 प्रतिशत अंक या परास्नातक में कम से कम 45 प्रतिशत अंक होने चाहिए। इसके साथ बीएड की डिग्री और उच्च प्राथमिक स्तर की टीईटी पास होना अनिवार्य किया गया है। शारीरिक शिक्षा विषय की भर्ती के लिए बीपीएड या बीपीई की उपाधि मान्य होगी। एक खास बदलाव यह भी है कि संशोधित नियमावली में कंप्यूटर विषय को भी शामिल कर लिया गया है, यानी अब कंप्यूटर विषय के अभ्यर्थी भी टीजीटी भर्ती के दायरे में आएंगे। सरकार ने टीजीटी की अर्हता में टीईटी उत्तीर्ण करने की शर्त पहली बार लागू करने का निर्णय लिया है।
पुरानी नियमावली की मांग करने वाले अभ्यर्थियों को लगा झटका
नियमावली संशोधन से उन अभ्यर्थियों को झटका लगा है, जो पुरानी नियमावली बहाल करने और पुराने पैटर्न पर परीक्षा कराने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे। प्रयागराज में पत्थर गिरजाघर स्थित धरनास्थल पर अभ्यर्थियों ने पांच सितंबर से आमरण अनशन शुरू कर दिया था। इसके बाद 22 सितंबर को मुख्यमंत्री ने घोषणा की थी कि पुरानी नियमावली को लेकर राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) को पत्र लिखा जाएगा। लेकिन बुधवार को नियमावली में संशोधन होने के बाद यह साफ हो गया है कि अब पुरानी नियमावली या पुराने पैटर्न पर परीक्षा नहीं होगी और टीजीटी भर्ती नई अर्हता के आधार पर ही कराई जाएगी।
चयन आयोग को दोबारा टीईटी कराने के निर्देश
टीजीटी भर्ती में टीईटी अनिवार्य करने के बाद शासन के उप सचिव चन्द्र श्याम मिश्र की ओर से बुधवार को उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के सचिव को पत्र भेजा गया है। इसमें आयोग से शिक्षक पात्रता परीक्षा दोबारा जल्द से जल्द कराने को कहा गया है। आयोग ने इससे पहले दो से चार जुलाई तक टीईटी कराई थी, जिसमें पंजीकृत 19,94,661 परीक्षार्थियों में से 17,70,714 यानी 88.77 प्रतिशत ने हिस्सा लिया था। इसके बाद पांच सितंबर को विशेष टीईटी के लिए विज्ञापन जारी हुआ था, जिसकी परीक्षा तीन नवंबर को प्रस्तावित है। एनसीटीई की गाइडलाइन के अनुसार एक साल में दो बार टीईटी कराई जानी चाहिए।
चयनित अभ्यर्थियों को 30 जून 2027 तक टीईटी पास करने की छूट
टीईटी अनिवार्य किए जाने के बीच सरकार ने अभ्यर्थियों को राहत भी दी है। शासन के विशेष सचिव डॉ. अशोक कुमार कनौजिया ने चयन आयोग के सचिव को पत्र लिखकर कहा है कि टीजीटी भर्ती के अभ्यर्थी के पास 30 जून 2027 तक संबंधित पद के लिए निर्धारित शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने का वैध प्रमाण-पत्र होना अनिवार्य होगा। चयन सूची में शामिल होने या चयनित घोषित होने के बावजूद नियुक्ति पाने का अधिकार तब तक नहीं होगा, जब तक अभ्यर्थी टीईटी पास नहीं कर लेते। यह शर्त नई भर्ती के विज्ञापन में शामिल की जाएगी। सरकार विधानसभा चुनाव से पहले टीजीटी के 17740 पदों का विज्ञापन जारी करना चाहती है, इसी कारण 30 जून 2027 तक टीईटी करने की छूट दी जा रही है। इस तरह चयनित अभ्यर्थियों को करीब आठ महीने का समय मिल जाएगा।








