Supreme Court Order for Teacher Appointment: सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल और कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर बड़ा अंतरिम आदेश दिया है। कोर्ट ने साफ कह दिया है कि RTE, NCTE और UGC के तहत तय की गई जरूरी योग्यता के बिना अब किसी को शिक्षक नियुक्त नहीं किया जा सकेगा और न ही ऐसे शिक्षकों को सेवा में बनाए रखा जा सकेगा। यह आदेश चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने दिया है। सुप्रीम कोर्ट का यह अंतिम आदेश प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक की नियुक्तियों को लेकर दिया गया है जहां शिक्षा का अधिकार अधिनियम में न्यूनतम योग्यता टीईटी पास करना जरूरी है तो वहीं उच्च शिक्षा के लिए भी न्यूनतम योग्यता पूरी होनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम उपाय के तौर पर निर्देश दिया है कि स्कूलों और कॉलेजों में सिर्फ वही शिक्षक नियुक्त हो सकेंगे या सेवा में बने रह सकेंगे, जो लागू कानूनी व्यवस्था के तहत तय आवश्यक योग्यता रखते हों। कोर्ट के अंतरिम निर्देश की मुख्य बातें इस तरह हैं:
- निर्धारित योग्यता के बिना स्कूलों में शिक्षक नियुक्त नहीं किए जाएंगे
- कॉलेजों में भी बिना तय योग्यता के शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होगी
- जरूरी योग्यता पूरी न करने वाले शिक्षकों को सेवा में जारी नहीं रखा जाएगा
- नियुक्ति के लिए संबंधित कानूनी ढांचे में तय योग्यताओं का पालन अनिवार्य होगा
आखिर यह मामला है क्या
यह मामला असम में शिक्षकों और शैक्षणिक संस्थानों के कर्मचारियों की सेवाओं को सरकारी दायरे में लाने वाली व्यवस्था को चुनौती देने वाली एक याचिका से जुड़ा है। याचिका में कहा गया है कि कुछ व्यवस्थाओं के जरिए ऐसे लोगों को भी सरकारी सेवा में शामिल किया जा रहा है, जिन्होंने कभी निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी भर्ती प्रक्रिया में हिस्सा ही नहीं लिया। यानी बिना किसी खुली परीक्षा या चयन प्रक्रिया से गुजरे कुछ लोग सीधे सरकारी शिक्षक के तौर पर स्थापित हो गए, और याचिका इसी प्रक्रिया पर सवाल उठाती है।
याचिकाकर्ता की मांग और कोर्ट में हुई दलील
याचिकाकर्ता ने कोर्ट से मांग की है कि ऐसे शिक्षकों की योग्यता की व्यापक जांच कराई जाए, और जिनके पास संसद द्वारा बनाए गए कानूनों व नियमों में तय न्यूनतम योग्यता नहीं है, उन्हें सरकारी या प्रांतीयकृत शिक्षण संस्थानों में पढ़ाने की इजाजत न दी जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में नोटिस भी जारी कर दिया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने खुद सवाल उठाया कि आखिर बिना तय योग्यता वाले लोगों को शिक्षक क्यों नियुक्त किया जा रहा है और इसका छात्रों के भविष्य पर क्या असर पड़ेगा। याचिकाकर्ता की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार ने कोर्ट को बताया कि कुछ मामलों में ऐसे लोगों को ‘Tutor’ जैसे अलग-अलग पदनाम देकर नियुक्त करने की कोशिश हो रही है, ताकि नियमों को दरकिनार किया जा सके, और इससे सीधे तौर पर शिक्षा की गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है।
RTE, NCTE और UGC की योग्यता का मतलब क्या है
सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश के जरिए यह स्पष्ट किया है कि किसी संस्थान में लंबे समय से काम करते रहना या किसी स्थानीय व्यवस्था के तहत नियुक्त हो जाना, इसे शिक्षक बनने की कानूनी योग्यता पूरी करना नहीं माना जा सकता। स्कूल स्तर पर शिक्षक नियुक्ति के लिए लागू नियमों के मुताबिक जरूरी शैक्षणिक योग्यता के साथ-साथ शिक्षक-प्रशिक्षण योग्यता भी होनी चाहिए। NCTE की वेबसाइट पर स्कूल शिक्षकों के लिए तय न्यूनतम योग्यताएं अलग से दी गई हैं। वहीं RTE Act की धारा 23 के तहत शिक्षक नियुक्ति के लिए न्यूनतम योग्यता तय करने का प्रावधान है, और इसी प्रावधान के आधार पर NCTE ने जरूरी योग्यताएं निर्धारित की हैं। उच्च शिक्षा यानी कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर नियुक्ति के लिए UGC के नियमों और वहां लागू भर्ती मानकों का पालन करना जरूरी होता है।
इस आदेश का असर किन पर पड़ेगा
सुप्रीम कोर्ट का यह अंतरिम आदेश फिलहाल असम की एक याचिका पर आया है, लेकिन इसमें RTE, NCTE और UGC जैसे राष्ट्रीय स्तर के कानूनों का हवाला दिया गया है, जो पूरे देश में स्कूल और उच्च शिक्षा संस्थानों में शिक्षक नियुक्ति पर लागू होते हैं। इसका सीधा असर उन नियुक्तियों और सेवा-विस्तार मामलों पर पड़ सकता है, जहां शिक्षकों की नियुक्ति खुली, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के बजाय स्थानीय या प्रशासनिक व्यवस्था के जरिए हुई है और जिनके पास NCTE, RTE या UGC के तहत तय न्यूनतम योग्यता नहीं है। मामले में नोटिस जारी होने के बाद अब आगे की सुनवाई में यह तय होगा कि ऐसे शिक्षकों की सेवा को लेकर आगे क्या रुख अपनाया जाता है।










