UPTET Passing Marks 2026: यूपी बेसिक एजुकेशन बोर्ड की तरफ से UPTET 2026 का रिजल्ट कभी भी जारी हो सकता है, और ऐसे में लाखों अभ्यर्थी अपने पासिंग मार्क्स को लेकर लगातार सवाल पूछ रहे हैं। इस बार परीक्षा में नॉर्मलाइजेशन प्रोसेस को लेकर भी चर्चा तेज है, जिसकी वजह से कैंडिडेट्स के मन में यह डर बैठा हुआ है कि कहीं उनके असली नंबर और नॉर्मलाइज्ड नंबर में फर्क आने से पासिंग मार्क्स का पूरा गणित ही न बदल जाए। अगर आपने भी परीक्षा दी है और बॉर्डरलाइन नंबर को लेकर उलझन में हैं, तो यह आर्टिकल आपके लिए है। यहां हम कैटेगरी वाइज पासिंग मार्क्स, पेपर वाइज क्वालिफाइंग मार्क्स के साथ-साथ यह भी बताएंगे कि नॉर्मलाइजेशन का असल में पासिंग मार्क्स पर कितना असर पड़ता है।
UPTET Passing Marks 2026
परीक्षा से जुड़ी मुख्य जानकारी नीचे टेबल में दी गई है, जिससे आपको एक नजर में पूरी तस्वीर समझ आ जाएगी।
| विवरण | जानकारी |
| आयोजक संस्था | उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग |
| परीक्षा का नाम | यूपी टीईटी (UPTET) 2026 |
| कुल अंक | 150 |
| जनरल कैटेगरी पासिंग मार्क्स | 90 अंक (60%) |
| आरक्षित कैटेगरी पासिंग मार्क्स | 82 अंक (55%) |
| निगेटिव मार्किंग | नहीं है |
| सर्टिफिकेट वैधता | Lifetime |
कैटेगरी के अनुसार UPTET पासिंग मार्क्स कितने हैं?
UPTET में पास होने के लिए हर कैटेगरी के लिए अलग-अलग न्यूनतम अंक तय किए गए हैं। जनरल कैटेगरी के अभ्यर्थियों को 60% अंक लाने होते हैं, जबकि आरक्षित वर्ग के कैंडिडेट्स के लिए यह सीमा 55% रखी गई है। ध्यान रहे कि सिर्फ पास होना ही टीचिंग जॉब की गारंटी नहीं देता, इसके बाद सुपर टीईटी जैसी भर्ती परीक्षा पास करना अलग से जरूरी होता है।
| कैटेगरी | न्यूनतम अंक | प्रतिशत |
| जनरल (UR) | 90/150 | 60% |
| OBC | 82/150 | 55% |
| SC | 82/150 | 55% |
| ST | 82/150 | 55% |
| EWS | 82/150 | 55% |
| दिव्यांग (PwD) | 82/150 | 55% |
| भूतपूर्व सैनिक | 82/150 | 55% |
पेपर 1 और पेपर 2 के लिए अलग-अलग पासिंग मार्क्स
UPTET दो पेपरों में आयोजित होती है — पेपर 1 उन अभ्यर्थियों के लिए है जो कक्षा 1 से 5 तक पढ़ाना चाहते हैं, और पेपर 2 कक्षा 6 से 8 के लिए है। जो कैंडिडेट दोनों पेपर देते हैं, उन्हें दोनों में अलग-अलग न्यूनतम अंक लाने होते हैं। एक पेपर में ज्यादा नंबर आने से दूसरे पेपर की कमी पूरी नहीं होती, यह बात कई कैंडिडेट अक्सर भूल जाते हैं।
| पेपर | जनरल पासिंग मार्क्स | आरक्षित पासिंग मार्क्स |
| पेपर 1 (कक्षा 1-5) | 90 (60%) | 82 (55%) |
| पेपर 2 (कक्षा 6-8) | 90 (60%) | 82 (55%) |
नॉर्मलाइजेशन से पासिंग मार्क्स पर क्या असर पड़ेगा?
यह सवाल सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है कि अगर नॉर्मलाइजेशन लागू होता है तो क्या पासिंग मार्क्स की सीमा 90 और 82 से बदल जाएगी। इसका सीधा जवाब है — नहीं। पासिंग मार्क्स की जो सीमा बोर्ड ने तय की है, वह फिक्स्ड रहती है और नॉर्मलाइजेशन की वजह से इसमें कोई बदलाव नहीं होता। नॉर्मलाइजेशन का मकसद अलग-अलग शिफ्ट या पाली में हुई परीक्षा के कठिनाई स्तर को बराबर करना होता है, ताकि किसी भी शिफ्ट में बैठे कैंडिडेट को नुकसान या फायदा न हो।
अब सवाल यह उठता है कि अगर किसी कैंडिडेट के असली अंक 82 के आसपास आते हैं, तो नॉर्मलाइजेशन के बाद उनका स्कोर ऊपर-नीचे हो सकता है या नहीं। यहां समझना जरूरी है कि नॉर्मलाइजेशन प्रोसेस सीधे तौर पर पासिंग मार्क्स को नहीं छूता, बल्कि यह मेरिट लिस्ट और फाइनल स्कोर कैलकुलेशन को प्रभावित करता है। यानी बॉर्डरलाइन पर मौजूद कैंडिडेट का असली स्कोर और नॉर्मलाइज्ड स्कोर अलग-अलग शिफ्ट में हुई परीक्षा की तुलना में थोड़ा ऊपर-नीचे दिख सकता है। इसी वजह से जो कैंडिडेट ठीक 82 या उसके आसपास नंबर लेकर आए हैं, उन्हें रिजल्ट आने तक थोड़ा सब्र रखना होगा।
इसका एक और असर यह हो सकता है कि पिछले साल जिस तरह का कट-ऑफ गणित सुपर टीईटी जैसी भर्ती में देखा गया था, इस बार नॉर्मलाइज्ड स्कोर की वजह से मेरिट लिस्ट में उम्मीदवारों की पोजीशन में मामूली अंतर आ सकता है। वैसे देखा जाए तो यह कोई नई बात नहीं है जहां भी मल्टी-शिफ्ट परीक्षा होती है, वहां नॉर्मलाइजेशन का यह असर देखने को मिलता ही है। बोर्ड की तरफ से अभी तक नॉर्मलाइजेशन का सटीक फॉर्मूला सार्वजनिक नहीं किया गया है, इसलिए किसी भी तरह के अनुमानित आंकड़े पर भरोसा करने से बचें और सिर्फ आधिकारिक सूचना का इंतजार करें।
पासिंग मार्क्स और कट-ऑफ में क्या फर्क है?
बहुत से अभ्यर्थी पासिंग मार्क्स और कट-ऑफ मार्क्स को एक ही चीज समझ लेते हैं, जबकि दोनों में बड़ा फर्क है। पासिंग मार्क्स वह न्यूनतम अंक है जो टीईटी सर्टिफिकेट पाने के लिए जरूरी होता है, और यह हर साल फिक्स्ड रहता है। वहीं कट-ऑफ मार्क्स उस भर्ती परीक्षा से जुड़ा होता है, जहां सीटों की संख्या, आवेदकों की संख्या और परीक्षा की कठिनाई के आधार पर हर साल अलग-अलग तय होता है। सीधी बात करें तो टीईटी पास करने का मतलब सिर्फ यह है कि आप टीचिंग जॉब के लिए आवेदन करने के योग्य हो गए हैं, नौकरी पक्की नहीं हुई।
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