यूपी के आउटसोर्स कर्मचारियों का बढ़ा वेतन लागू करने का आदेश जारी, अब 39,000 रुपये तक मिलेगा पारिश्रमिक

UP Outsource Employees Salary Hike : उत्तर प्रदेश के सरकारी विभागों में आउटसोर्सिंग पर काम कर रहे कर्मचारियों के लिए राहत की खबर है। शासन ने इन कर्मचारियों के मासिक पारिश्रमिक की नई दरें तय कर दी हैं और सोमवार को इसका शासनादेश भी जारी कर दिया गया। प्रमुख सचिव मनीष चौहान की ओर से जारी इस आदेश में कर्मचारियों को चार श्रेणियों में बांटा गया है और हर श्रेणी के लिए अलग रकम तय की गई है। नई दरें दो सितंबर 2026 से प्रभावी मानी जाएंगी। अब श्रेणी के हिसाब से किसी कर्मचारी को 17,646 रुपये मिलेंगे तो किसी को 39 हजार रुपये तक। कई सालों से कम पैसे में काम कर रहे आउटसोर्स कर्मियों को इस फैसले से सीधा फायदा होगा, क्योंकि उनके हाथ में आने वाली रकम पहले के मुकाबले बढ़ेगी।

चारों श्रेणियों में कितना पारिश्रमिक तय हुआ

शासन ने 19 सितंबर 2025 को जारी पुराने शासनादेश को आधार बनाकर आउटसोर्स कर्मियों के पारिश्रमिक का श्रेणीवार निर्धारण किया है। इसमें श्रेणी-1 के कर्मचारियों के लिए सबसे ज्यादा 39 हजार रुपये प्रतिमाह तय किए गए हैं। श्रेणी-2 के कर्मचारियों को 21,947 रुपये, श्रेणी-3 को 19,446 रुपये और श्रेणी-4 को 17,646 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे। यानी सबसे निचली श्रेणी में भी अब 17,646 रुपये का पारिश्रमिक तय हो गया है। चारों श्रेणियों की दरें नीचे दी गई तालिका में आसानी से देखी जा सकती हैं।

CategoryFixed Remuneration (Per Month)
Category-1₹39,000
Category-2₹21,947
Category-3₹19,446
Category-4₹17,646

ईपीएफ और ईएसआई कटने के बाद खाते में कितना आएगा

तय पारिश्रमिक में से कर्मचारी के हिस्से की कटौती होने के बाद जो रकम बचेगी, वही हर महीने बैंक खाते में पहुंचेगी। श्रेणी-4 के कर्मचारियों के खाते में कटौती के बाद 15,396 रुपये आएंगे। श्रेणी-3 के कर्मचारियों को 16,966 रुपये और श्रेणी-2 के कर्मचारियों को 19,148 रुपये मिलेंगे। श्रेणी-1 के कर्मचारियों का पारिश्रमिक 39 हजार रुपये तय किया गया है और यह इस श्रेणी की निर्धारित रकम है। इस तरह खाते में आने वाली राशि और तय पारिश्रमिक में जो अंतर दिखेगा, वह ईपीएफ और ईएसआई की कटौती की वजह से होगा। इसलिए कर्मचारियों को अपनी श्रेणी की तय दर और हाथ में आने वाली रकम को अलग-अलग समझकर देखना होगा।

कर्मचारी के वेतन से कितनी कटौती होगी

नई व्यवस्था में कर्मचारी के वेतन से ईपीएफ के रूप में 12 प्रतिशत और ईएसआई के रूप में 0.75 प्रतिशत की कटौती की जाएगी। यानी कुल 12.75 प्रतिशत हिस्सा हर महीने कटेगा और बाकी रकम खाते में जाएगी। यह कटौती कर्मचारी के अपने भविष्य और स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ी है, इसलिए यह पैसा कर्मचारी के ही नाम पर जमा होता रहेगा। श्रेणी-4 के 17,646 रुपये में से इसी हिसाब से कटौती के बाद 15,396 रुपये बचते हैं, जबकि श्रेणी-3 और श्रेणी-2 में भी यही फॉर्मूला लागू होने से क्रमशः 16,966 और 19,148 रुपये की रकम बनती है।

नियोक्ता का अंशदान कौन भरेगा

कर्मचारी की कटौती के अलावा नियोक्ता की ओर से भी अंशदान जमा होना है। इसमें ईपीएफ का 12 प्रतिशत और ईएसआई का 3.25 प्रतिशत हिस्सा शामिल है, जिसे संबंधित सरकारी विभाग खुद वहन करेंगे। यह रकम कर्मचारियों पर नहीं डाली जाएगी, बल्कि विभाग अपने स्तर पर इसका भुगतान करेंगे। खास बात यह है कि यह राशि भी आगे चलकर कर्मचारियों के खाते में ही जमा होगी, इसलिए इसका लाभ भी उन्हीं को मिलेगा। इससे आउटसोर्स कर्मियों के भविष्य की जमा पूंजी में अच्छा इजाफा होने की उम्मीद है।

जीएसटी और सेवा शुल्क का बोझ विभागों पर, बजट का इंतजाम करना होगा

शासनादेश में साफ किया गया है कि जीएसटी, सर्विस चार्ज और उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम का एक प्रतिशत सेंटेज चार्ज भी सरकारी विभागों को ही देना होगा। इसके लिए विभागों को अपने बजट में अलग से व्यवस्था करनी पड़ेगी। जिन विभागों ने जेम पोर्टल के जरिये नई दरों से कम पारिश्रमिक पर कर्मचारी रखे हुए हैं, उन्हें बढ़े हुए खर्च के लिए पुनर्विनियोग के माध्यम से बजट उपलब्ध कराया जाएगा। इससे विभागों के सामने पैसे की कमी की दिक्कत नहीं आएगी और कर्मचारियों को तय दर के मुताबिक भुगतान मिल सकेगा। आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए यह फैसला इसलिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि अब उनके पारिश्रमिक की दरें श्रेणी के आधार पर एक समान तय हो गई हैं।

Sangam Patel

Sangam Patel is a Content Writer at StaffTak.in. He writes about Teacher Recruitment, Government Jobs, Education News, Scholarships, Admit Cards, Results, and Admissions, providing accurate and reliable updates from official sources.

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