BEd, DElEd and CTET Certificate Details: टीचिंग लाइन में करियर बनाने की सोच रहे स्टूडेंट्स के मन में अक्सर एक कन्फ्यूजन बना रहता है कि शिक्षक बनने के लिए D.El.Ed करें, B.Ed करें या सीधे CTET की तैयारी में जुट जाएं। बहुत से कैंडिडेट इन तीनों को एक-दूसरे का ऑप्शन मान बैठते हैं, जबकि हकीकत में तीनों का रोल, योग्यता और मकसद बिल्कुल अलग है। UPTET और CTET जैसी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे कैंडिडेट्स के लिए यह समझना बेहद जरूरी है कि किस स्टेज पर कौन सा कोर्स करना है, ताकि करियर की प्लानिंग शुरू से ही सही दिशा में हो। नीचे आसान भाषा में तीनों के बीच का फर्क और सही रोडमैप बताया गया है।
D.El.Ed क्या है और यह किसके काम का है
D.El.Ed यानी Diploma in Elementary Education दो साल का डिप्लोमा कोर्स है, जिसमें एडमिशन के लिए 12वीं पास होना जरूरी है, वह भी कम से कम 50% अंकों के साथ। यह कोर्स खासतौर पर उन कैंडिडेट्स के लिए बना है जो प्राइमरी स्तर यानी कक्षा 1 से 5 तक बच्चों को पढ़ाना चाहते हैं। जो स्टूडेंट ग्रेजुएशन पूरा होने का इंतजार किए बिना कम समय और कम खर्च में टीचिंग फील्ड में एंट्री लेना चाहते हैं, उनके लिए यह सबसे सीधा रास्ता माना जाता है।
B.Ed का स्कोप D.El.Ed से कैसे अलग है
B.Ed यानी Bachelor of Education एक प्रोफेशनल डिग्री कोर्स है, जिसकी अवधि भी दो साल की होती है, लेकिन इसमें एडमिशन के लिए ग्रेजुएशन पूरा होना अनिवार्य शर्त है। B.Ed करने वाले कैंडिडेट कक्षा 6 से 12 तक यानी अपर-प्राइमरी और माध्यमिक स्तर पर पढ़ाने के पात्र बनते हैं। जो कैंडिडेट आगे चलकर टीजीटी, पीजीटी जैसे पदों पर या प्रशासनिक भूमिका में जाना चाहते हैं, उनके लिए B.Ed ज्यादा फायदेमंद विकल्प रहता है क्योंकि इससे करियर का दायरा काफी बड़ा हो जाता है।
CTET कोई डिग्री नहीं, बल्कि पात्रता परीक्षा है
बहुत से कैंडिडेट यह गलतफहमी पाल लेते हैं कि CTET भी कोई कोर्स या डिग्री है, जबकि असल में यह CBSE द्वारा आयोजित एक पात्रता परीक्षा यानी Teacher Eligibility Test है। चाहे कैंडिडेट ने B.Ed किया हो या D.El.Ed, सरकारी और केंद्रीय स्कूलों जैसे KVS और NVS में शिक्षक भर्ती के लिए आवेदन करने से पहले CTET पास करना जरूरी होता है। CTET दो पेपर में होता है, Paper 1 उन कैंडिडेट्स के लिए है जो कक्षा 1 से 5 तक पढ़ाना चाहते हैं, जबकि Paper 2 कक्षा 6 से 8 तक टीचिंग के लिए जरूरी है। जो कैंडिडेट राज्य स्तर पर टीचिंग करना चाहते हैं, उनके लिए CTET के साथ-साथ अपने राज्य की TET परीक्षा जैसे UPTET भी पास करना जरूरी होता है।
तीनों में अंतर एक नजर में
| मापदंड | D.El.Ed | B.Ed | CTET |
|---|---|---|---|
| प्रकार | डिप्लोमा | डिग्री | पात्रता परीक्षा |
| अवधि | 2 वर्ष | 2 वर्ष | कोर्स नहीं, परीक्षा |
| न्यूनतम योग्यता | 12वीं पास (50% अंकों के साथ) | ग्रेजुएशन पूरा होना जरूरी | D.El.Ed या B.Ed पास/अपेयरिंग |
| टीचिंग लेवल | कक्षा 1 से 5 | कक्षा 6 से 12 | Paper 1 (1-5) और Paper 2 (6-8) |
| जरूरत | प्राइमरी टीचर बनने के लिए | अपर-प्राइमरी, टीजीटी, पीजीटी के लिए | भर्ती परीक्षा में बैठने के लिए अनिवार्य |
प्राइमरी टीचर बनने का रास्ता कैसा रहेगा
जो कैंडिडेट कक्षा 1 से 5 तक पढ़ाना चाहते हैं, उनके लिए सबसे पहले 12वीं कम से कम 50% अंकों के साथ पास करनी होती है। इसके बाद D.El.Ed कोर्स में एडमिशन लेकर उसे पूरा करना होता है और फिर CTET का Paper 1 क्लियर करना जरूरी होता है। यह सब पूरा होने के बाद ही कैंडिडेट राज्य स्तरीय भर्ती परीक्षा या KVS-NVS जैसी केंद्रीय भर्तियों के लिए आवेदन करने के पात्र बनते हैं।

अपर-प्राइमरी और सेकेंडरी टीचर बनने का रास्ता कैसा रहेगा
बड़ी कक्षाओं में पढ़ाने का सपना देखने वाले कैंडिडेट्स को पहले अपनी पसंद के विषय से ग्रेजुएशन पूरा करना होता है। इसके बाद B.Ed कोर्स में एडमिशन लेना जरूरी होता है और फिर CTET का Paper 2 और अपने राज्य की टीईटी परीक्षा पास करनी होती है। इन दोनों पड़ावों को पार करने के बाद ही कैंडिडेट राज्य या केंद्रीय शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में शामिल होने के लिए एलिजिबल होते हैं।
कैंडिडेट के लिए कौन सा विकल्प सही रहेगा
जिन कैंडिडेट्स को जल्दी नौकरी की तलाश है, उनके लिए 12वीं के तुरंत बाद D.El.Ed का रास्ता चुनना बेहतर रहता है क्योंकि इसमें कम समय में प्राइमरी टीचर बनने का मौका मिल जाता है। वहीं जो कैंडिडेट सीनियर क्लासेस पढ़ाना चाहते हैं या भविष्य में बड़े पदों पर जाना चाहते हैं, उनके लिए ग्रेजुएशन के बाद B.Ed करना ज्यादा फायदेमंद रहता है। इन दोनों में से कोई भी रास्ता चुनें, CTET की तैयारी कोर्स के दौरान ही शुरू कर देनी चाहिए, क्योंकि CTET या स्टेट टीईटी सर्टिफिकेट के बिना कोई भी कैंडिडेट सरकारी शिक्षक भर्ती का फॉर्म भरने के योग्य नहीं माना जाता।।
बिना टीईटी भी बन सकते हैं क्या शिक्षक?
वैसे तो देश भर में शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद कोई भी व्यक्ति कक्षा एक से आठ तक के सरकारी स्कूलों में बिना टीईटी शिक्षक नहीं बन सकते हैं लेकिन केंद्रीय विद्यालय या फिर नवोदय विद्यालय की कुछ शिक्षक पदों को बिना टीईटी भी भरा जाता है हालांकि यह पद संविदा के आधार पर होते हैं और एक निश्चित समय के लिए नियुक्त किए जाते हैं अगर आपको सरकारी शिक्षक बनना है तो ट पास करना जरूरी होगा।


