Agniveer Reservation Latest News: उत्तर प्रदेश सरकार ने पूर्व अग्निवीरों के लिए रोजगार के अवसरों का दायरा और बढ़ा दिया है। पुलिस और पीएसी में सीधी भर्ती में आरक्षण देने के बाद अब वन रक्षक और वन्यजीव रक्षक की सीधी भर्ती में भी पूर्व अग्निवीरों को 20 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने का फैसला किया गया है। इसके लिए भर्ती नियमावली में जरूरी संशोधन किया जा रहा है। यह सुविधा उन्हीं पूर्व अग्निवीरों को मिलेगी जिन्होंने भारतीय सशस्त्र बलों में चार साल की सेवा पूरी की है। यह आरक्षण भूतपूर्व सैनिकों की तरह ही दिया जाएगा, यानी यह संबंधित श्रेणी के भीतर ही लागू होगा। सीधे शब्दों में कहें तो सामान्य, ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग के अभ्यर्थियों को उनकी अपनी श्रेणी के 20 प्रतिशत पदों पर ही इसका लाभ मिलेगा। गौरतलब है कि बिहार सरकार ने भी हाल ही में वन रक्षक भर्ती में पूर्व अग्निवीरों को आरक्षण देने का नियम बनाया है, जिसके बाद उत्तर प्रदेश ने भी इसी दिशा में कदम बढ़ाया है।
UP वन रक्षकों के कुल पदों का ब्योरा
प्रदेश में भूतपूर्व सैनिकों की तर्ज पर अब सभी श्रेणियों में क्षैतिज आरक्षण दिया जाएगा। आंकड़ों के अनुसार वन रक्षकों के कुल पद 3913 हैं, जिनमें से इस समय 2192 पदों पर कर्मचारी कार्यरत हैं। वर्तमान में जो भर्ती प्रक्रिया चल रही है, उसमें 700 पदों को भरा जाना है, जबकि प्रदेश में अभी 1021 पद रिक्त पड़े हैं। इन आंकड़ों से साफ है कि वन विभाग में खाली पदों को भरने की जरूरत काफी समय से बनी हुई थी, और अब पूर्व अग्निवीरों को शामिल करने का यह फैसला इस दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। विभाग का मानना है कि जिन युवाओं ने सेना में प्रशिक्षण लिया है, वे अनुशासन और शारीरिक क्षमता के मामले में इस तरह की जिम्मेदारी वाली नौकरियों के लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं।
नियमावली में संशोधन और विभागीय कार्यवाही
योगी सरकार ने वन रक्षक और वन्यजीव रक्षक की सीधी भर्ती में पूर्व अग्निवीरों को समायोजित करने का जो निर्णय लिया है, वह भविष्य में होने वाली सभी भर्तियों में लागू होगा। इस संबंध में विभागीय प्रमुख सचिव वी. हेकाली झिमोमी ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं विभागाध्यक्ष सुनील चौधरी को उत्तर प्रदेश अवर अधीनस्थ वन यानी वन रक्षक और वन्यजीव रक्षक सेवा नियमावली-2015 के नियम-4 और नियम-6 में संशोधन के निर्देश दिए हैं। इस व्यवस्था के लागू होने के बावजूद आरक्षण की कुल सीमा 50 प्रतिशत तक ही सीमित रखी जाएगी, ताकि सामान्य भर्ती प्रक्रिया प्रभावित न हो। इसका लाभ केवल प्रदेश के पूर्व अग्निवीरों को ही दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे वन और वन्यजीव संरक्षण जैसे चुनौतीपूर्ण कार्य के लिए प्रशिक्षित और अनुशासित मानव संसाधन मिलेगा, वहीं दूसरी तरफ पूर्व अग्निवीरों के पुनर्वास को भी मजबूती मिलेगी।
टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स में भी हो सकते हैं शामिल
वन रक्षक भर्ती के अलावा स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स में भी पूर्व अग्निवीरों को रखने पर विचार किया जा रहा है। टाइगर रिजर्व में तैनात रहने वाली इस विशेष फोर्स में पूर्व अग्निवीरों को शामिल करने का प्रस्ताव पीलीभीत टाइगर रिजर्व की ओर से सरकार को भेजा गया है। चूंकि पीलीभीत में अभी यह प्रोटेक्शन फोर्स गठित नहीं हुई है, इसलिए वहां पूर्व अग्निवीरों को रखे जाने की संभावना ज्यादा मानी जा रही है। वहीं दुधवा टाइगर रिजर्व में यह फोर्स पहले से ही गठित है और वहां फिलहाल पुलिस और पीएसी के जवान ही प्रतिनियुक्ति पर तैनात हैं। सरकार की मंशा है कि अग्निवीरों को मिलने वाला सैन्य प्रशिक्षण वन्यजीव संरक्षण और टाइगर रिजर्व की सुरक्षा जैसे संवेदनशील कार्यों में काफी काम आएगा, जिससे वन क्षेत्रों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी।


