Teacher TET Supreme Court Decision: देश भर के प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ा रहे शिक्षकों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने थोड़ी राहत दे दी है। शिक्षक पात्रता परीक्षा की छूट मांगने गए शिक्षकों के लिए TET पास करना अनिवार्य कर दिया गया है। 1 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने सभी शिक्षकों को 2 साल के भीतर TET पास करने का आदेश बनाया था, जिसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल की गई थी। इस रिव्यू पिटीशन की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा से छूट देने से इनकार कर दिया है। शिक्षक बने रहने के लिए सभी शिक्षकों को अब 3 साल के भीतर TET पास करना अनिवार्य होगा। 2 साल का समय पहले दिया गया था, अब एक साल और आगे बढ़ा दी है। इस प्रकार कुल 3 साल में शिक्षकों को TET पास करना जरूरी होगा।
बता दें 1 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश में TET पास करने के लिए 2 साल का समय दिया गया था। अब शिक्षकों के लिए TET पास करने के लिए 1 साल का समय और दिया गया है। शीर्ष अदालत द्वारा कार्यरत शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करने के लिए अब 31 अगस्त 2028 की डेडलाइन रखी गई है। पहले शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करने की डेडलाइन 31 अगस्त 2027 रखी गई थी। कोर्ट ने पुनर्विचार याचिकाओं की सुनवाई के बाद यह अहम निर्णय दिया है। हालांकि अदालत ने सभी याचिकाओं को फिर से खारिज कर दिया है और सुनवाई के बाद जारी आदेश में कहा गया है कि ऐसे शिक्षक जो 2009 से पहले नियुक्त हैं, उन सभी के लिए भी TET पास करना अनिवार्य होगा। याचिकाओं में 2009 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET से छूट देने की मांग की गई थी, जिसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि देश में काम कर रहे सभी शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक TET पास करना होगा। अगर ऐसे शिक्षक TET पास नहीं कर पाते हैं तो नौकरी पर खतरा बना हुआ है।
रिव्यू पिटीशन की खुली अदालत में हुई सुनवाई
बता दें सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन की सुनवाई ओपन कोर्ट में की गई थी, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि शिक्षक स्वार्थी ना बनें और केवल अपनी नौकरी की सुरक्षा के बारे में ही न सोचें बल्कि उन बच्चों के बारे में भी विचार करें जो संविधान के आर्टिकल 21 के अनुसार क्वालिटी एजुकेशन की आवश्यकता रखते हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सरकारों और पश्चिम बंगाल तथा केरल के शिक्षक संगठनों द्वारा जो याचिकाएं दायर की गई थीं, वह कई शिक्षक पात्रता परीक्षा अनिवार्यता विरोधी याचिकाओं पर भी सुनवाई कर रही थी। इन याचिकाओं में सितंबर 2025 के सर्वोच्च न्यायालय के उस आदेश की समीक्षा की मांग की गई थी जिसमें देश भर के गैर अल्पसंख्यक स्कूलों में कक्षा एक से आठ तक के पढ़ाने वाले शिक्षकों को 2 वर्ष के भीतर शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करने का आदेश दिया गया था। इन सभी सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा रिव्यू पिटीशन की सुनवाई का फैसला रिजर्व कर लिया गया था।
क्या है शिक्षक TET का मामला
जानकारी के लिए बता दें शिक्षकों को नौकरी में बने रहने के लिए 2 साल के भीतर शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने दिया था। वहीं ऐसे शिक्षक जिनके रिटायरमेंट में 5 साल से कम समय बचा हुआ है, उन सभी शिक्षकों के लिए TET से छूट दी गई थी। ऐसे सभी शिक्षक रिटायरमेंट तक नौकरी कर सकते हैं। हालांकि अगर ऐसे शिक्षक प्रमोशन चाहते हैं तो उन्हें भी शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करनी होगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद देश भर के लगभग 30 लाख शिक्षकों की नौकरी पर तलवार लटक गई है। उत्तर प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान सहित देश के विभिन्न राज्यों में ऐसे शिक्षक हैं जो बिना शिक्षक पात्रता परीक्षा पास किए कई सालों से प्राइमरी स्कूलों में टीचिंग कर रहे हैं। अब इन सभी शिक्षकों को 3 साल के भीतर शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करना होगा। 3 साल का समय सितंबर 2025 फैसले की तिथि से लागू होगा यानी कि उन्हें 31 अगस्त 2028 तक TET पास करना जरूरी होगा। केवल 5 साल से कम नौकरी वाले शिक्षकों को ही इससे छूट दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार का तर्क किया खारिज
सुनवाई के दौरान तमिलनाडु सरकार की ओर से कहा गया था कि अगर यह फैसला लागू होता है तो अकेले तमिलनाडु में ही चार लाख से अधिक शिक्षक प्रभावित हो जाएंगे। राज्य सरकार द्वारा यह भी जानकारी कोर्ट में दी गई थी कि अगर इस आदेश को जमीनी स्तर पर लागू किया जाता है तो राज्य को शिक्षकों के बिना कक्षाएं भी चलानी पड़ सकती हैं। स्कूल शिक्षकों से खाली हो जाएंगे। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता ने कहा था कि बच्चों को फ्री और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 बनाया गया है, केवल नौकरी की सुरक्षा के बारे में नहीं। हम बच्चों की क्वालिटी शिक्षा के बारे में भी सोच रहे हैं। और तमिलनाडु सरकार की इन दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया था।
धारा 23(2) को लेकर जस्टिस दत्ता ने दिलाई याद
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दत्ता ने शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 23(2) का जिक्र करते हुए कहा कि इसके अंतर्गत प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी और शिक्षक शिक्षा संस्थानों की अनुपलब्धता के मामले में शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करना अनिवार्य योग्यता हासिल करने के लिए 5 साल का समय दिया गया है। इसके बाद धारा 23(2) के दूसरे प्रावधान की ओर भी कोर्ट ने कहा कि 2017 में अधिनियम में संशोधन के माध्यम से जोड़ा गया था। उसमें 31 मार्च 2015 तक नियुक्त या कार्यरत उन सभी शिक्षकों को राहत दी गई थी जिनके पास न्यूनतम आवश्यक शैक्षणिक योग्यताएं नहीं थीं। उन्हें यह योग्यता प्राप्त करने के लिए 4 साल का अलग से समय दिया गया था, जो कि पहले ही बीत चुका था।
यूपी में 2 लाख से अधिक शिक्षक TET पास नहीं
जहां देश भर में 30 लाख से अधिक ऐसे शिक्षक बताई जा रहे हैं जो TET पास नहीं हैं, तो वहीं अकेले उत्तर प्रदेश में 2 लाख से अधिक ऐसे शिक्षक हैं जो शिक्षक पात्रता परीक्षा पास नहीं हैं। हालांकि उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा का आयोजन जुलाई 2026 में प्रस्तावित है और शिक्षकों के पास TET पास करने का शानदार मौका है। हालांकि अगस्त 2028 तक कई बार केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा और उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिलेगा। शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करके अपनी नौकरी बचा सकते हैं। हालांकि शिक्षकों को ध्यान देना होगा कि 31 अगस्त 2028 TET पास करने की आखिरी डेडलाइन है। अगर इस तारीख तक शिक्षक पात्रता परीक्षा पास नहीं कर पाते हैं तो उन्हें नौकरी से निकाला जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा रेपुटेशन खारिज करने के बाद अब शिक्षक पात्रता परीक्षा छूट के सभी रास्ते बंद हो चुके हैं अब हर हाल में शिक्षकों को टीईटी पास करना होगा।






